अंबिकापुर/सरगुजा। सरगुजा संभाग में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत ने आम लोगों से लेकर परिवहन और उद्योग तक को प्रभावित कर दिया है। स्थिति यह है कि बीपीसीएल के करीब 95% पेट्रोल पंप ड्राई हो चुके हैं, जबकि इंडियन ऑयल और एचपीसीएल ने भी सप्लाई लगभग सीमित कर दी है।
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पिछले एक पखवाड़े से चल रही कमी अब गंभीर संकट में बदल गई है। अंबिकापुर के बनारस चौक स्थित अंबिका पेट्रोल पंप जैसे बड़े आउटलेट्स पर भी तेल की कमी देखी जा रही है। जहां कहीं पेट्रोल-डीजल उपलब्ध है, वहां लंबी कतारें लग रही हैं।
क्यों आई संकट की स्थिति?
पेट्रोलियम कंपनियों ने जनवरी-फरवरी की खपत के आधार पर सप्लाई की लिमिट तय कर दी है। हालांकि यह निर्णय लिखित रूप में नहीं है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर साफ दिख रहा है। बढ़ती मांग—खासकर शादी सीजन और खेती के काम—के बीच सीमित सप्लाई ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।
सप्लाई पर कड़ी पाबंदी
बसों और ट्रकों को भी सीमित मात्रा में डीजल दिया जा रहा है। 200 लीटर से ज्यादा डीजल देने पर कंपनियां पेट्रोल पंप संचालकों को नोटिस जारी कर रही हैं और सप्लाई रोकने की चेतावनी दे रही हैं। कई पंपों का ऑर्डर पोर्टल भी लॉक कर दिया गया है।
डीलर्स एसोसिएशन ने मांगा हस्तक्षेप
सरगुजा पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल के मुताबिक, तीनों कंपनियों द्वारा सप्लाई घटाने से स्थिति गंभीर हो गई है।
उद्योग और परिवहन पर असर
डीजल संकट का असर कोयला उत्पादन और परिवहन पर भी पड़ रहा है। खदानों में उपयोग होने वाली मशीनें और ट्रेलर-ट्रक सीमित डीजल के कारण खड़े होने लगे हैं, जिससे उत्पादन ठप होने की आशंका है।
कंज्यूमर पंप बंद होने से बढ़ी दिक्कत
पहले खनन और ट्रांसपोर्ट सेक्टर ‘कंज्यूमर पंप’ से सस्ता डीजल लेते थे, लेकिन सरकार द्वारा इनका रेट बढ़ाकर 132 रुपए प्रति लीटर करने के बाद ये पंप बंद हो गए हैं। इससे सामान्य पेट्रोल पंपों पर दबाव और बढ़ गया है।
डीलर्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और घाटे के कारण कंपनियों ने सप्लाई घटाई है। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि जहां तेल उपलब्ध है, वहां भी सीमित मात्रा में ही वितरण किया जा रहा है।



