रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने मामले से जुड़ी दो अलग-अलग याचिकाओं को एक साथ जोड़ते हुए उनकी संयुक्त सुनवाई 23 अप्रैल को तय की है।
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दरअसल, जोगी ने दो आदेशों को चुनौती दी है—पहला, जिसमें सीबीआई को अपील करने की अनुमति दी गई थी, और दूसरा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला, जिसमें उन्हें हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट दोनों मामलों पर एक साथ सुनवाई करेगा।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 6 अप्रैल को जोगी को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी करार दिया था और उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया था। इसी फैसले के खिलाफ जोगी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
इस बीच, अमित जोगी ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने बताया कि उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा, सिद्धार्थ दवे और शशांक गर्ग ने पक्ष रखा। जोगी ने अपनी कानूनी टीम का आभार जताते हुए निष्पक्ष न्याय की उम्मीद जताई है।



