रायपुर। आम आदमी पार्टी के प्रदेश कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने आगामी डिजिटल जनगणना के लिए निर्धारित 33 बिंदुओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए अलग से कॉलम नहीं होने पर पिछड़ा वर्ग की उपेक्षा किए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार पिछड़ा वर्ग के लिए दोहरा मापदंड अपना रही है।
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पिछड़े समाज के विकास की बात करने वाली केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की साय सरकार आज इस मामले में असहाय क्यों नज़र आ रही है, क्या पिछड़ों को सिर्फ वोट बैंक बनाकर रखना चाहती है सरकार? राजपत्र के बिंदु क्रमांक 12 में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए स्पष्ट कॉलम दिया गया है, लेकिन ओबीसी वर्ग की गणना के लिए कोई प्रावधान नहीं रखा गया है।
एक ओर केंद्र सरकार जातिगत जनगणना कराने की घोषणा करती है, तो दूसरी ओर राजपत्र से ओबीसी का कॉलम गायब रखना समाज के साथ अन्याय है। बिना पृथक कॉलम के ओबीसी वर्ग की सही संख्या कैसे सामने आएगी? पिछड़ों को उनके अधिकार से वंचित रखने की सरकार की साजिश है।भारत देश एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है जिसे केंद्र की भाजपा सरकार मिटाने पर तुली हुई है। वहीं राष्ट्रीय जनगणना 2027 के 33 बिंदु वाले कालम में ओबीसी वर्ग की पृथक उल्लेख नहीं होने से नाराजगी व्यक्त करते हुए सर्व छत्तीसगढ़िया समाज एससी एसटी ओबीसी महासंघ ने प्रधानमंत्री के नाम से कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा है इससे स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में पिछड़ा वर्ग समाज में इस जनगणना के प्रति कितना रोष है।
उन्होंने आम आदमी पार्टी की ओर से चेतावनी दी कि यदि जनगणना में पिछड़ा वर्ग के लिए अलग से कॉलम नहीं दिया जाता है तो आम आदमी पार्टी द्वारा छत्तीसगढ़ में इसके लिए जल्द ही बड़ा आंदोलन करेगी।



