रायपुर : गरियाबंद जिले के देवभोग थाना क्षेत्र अंतर्गत उरमाल गांव में आयोजित छह दिवसीय ओपेरा कार्यक्रम विवादों में घिर गया है। मनोरंजन कार्यक्रम की अनुमति लेकर आयोजित इस आयोजन में तीसरे दिन से कथित रूप से अश्लील नृत्य कराए जाने के आरोप सामने आए हैं। मामले के उजागर होने के बाद पुलिस ने आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्यक्रम को समय से पहले बंद करा दिया।
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जानकारी के अनुसार, उरमाल गांव के कुछ युवकों की समिति द्वारा ओपेरा आयोजन के लिए मैनपुर एसडीएम तुलसी दास से अनुमति ली गई थी। शुरुआती दिनों में कार्यक्रम सामान्य रहा, लेकिन 7 जनवरी से आयोजन में आपत्तिजनक नृत्य प्रस्तुतियों की शिकायतें मिलने लगीं। आरोप है कि इसके लिए ओडिशा से डांसरों को आमंत्रित किया गया था, जिनसे जुड़े प्रचार वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए।
बताया जा रहा है कि 8 जनवरी से कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दर्शक जुटने लगे। वहीं 9 जनवरी को एसडीएम के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है। आयोजकों का दावा है कि उनके लिए दर्शक दीर्घा में आगे की सीट आरक्षित की गई थी। आरोप है कि देर रात तक मंच पर आपत्तिजनक नृत्य प्रस्तुतियां दी गईं और पंडाल में मौजूद कुछ लोगों द्वारा खुलेआम पैसे लुटाए गए।
10 जनवरी को कार्यक्रम से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने संज्ञान लिया। देवभोग थाना प्रभारी फैजुल शाह ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है। वहीं लिखित शिकायत मिलने पर आयोजनकर्ता देवेंद्र राजपूत, गोविंद देवांगन, नरेंद्र साहू और हसन डाडा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 (3)(5) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
थाना प्रभारी के अनुसार, कार्यक्रम की अनुमति 10 जनवरी तक दी गई थी, लेकिन विवाद की स्थिति को देखते हुए उसी दिन आयोजन को बंद करा दिया गया।
हालांकि, पूरे मामले में जिला प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि वीडियो उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह भी कहा जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान कुछ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद थे, इसके बावजूद समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया।
उल्लेखनीय है कि जिले में बीते कुछ महीनों से प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में उरमाल ओपेरा प्रकरण ने प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है, वहीं प्रशासन की चुप्पी को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा जारी है।



