रायपुर। फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों रुपये के कागजी इनवाइस जारी करने और लगभग 9 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का मामला सामने आया है। इस मामले में केंद्रीय जीएसटी की टीम ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) द्वारा की जा रही है।
यह भी पढ़े :- ‘ऑपरेशन समाधान’ के तहत राजधानी में बड़ी कार्रवाई, 1 हजार से ज्यादा लोगों की तस्दीक, 100 से अधिक संदिग्ध चिन्हित
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने 50 से अधिक फर्जी फर्मों का नेटवर्क खड़ा कर बिना किसी वास्तविक वस्तु या सेवा की आपूर्ति किए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लिया। डीजीजीआई की टीम ने 19 दिसंबर को रायपुर के मैग्नेटो मॉल स्थित मेसर्स प्रेम एंटरप्राइजेज में छापेमारी की थी, जहां से बड़ी संख्या में फर्जी कंपनियों से जुड़े दस्तावेज और लेन-देन के साक्ष्य बरामद किए गए।
छापेमारी के दौरान कार्यालय से करीब 20 सिम कार्ड जब्त किए गए। जांच अधिकारियों के अनुसार, फर्जी फर्मों से जुड़े ई-मेल आईडी विक्रम मंधानी द्वारा संचालित किए जा रहे थे। उसके पास से 50 से अधिक फर्जी फर्मों के जीएसटी लॉगिन आईडी और पासवर्ड भी बरामद हुए हैं। इन फर्मों के नाम पर केवल कागजी इनवाइस जारी किए जा रहे थे, जबकि कोई वास्तविक कारोबारी गतिविधि नहीं हो रही थी।
48 करोड़ के इनवाइस, आंकड़ा बढ़ने की संभावना
अधिकारियों ने बताया कि इन फर्जी फर्मों के जरिए करीब 48 करोड़ रुपये के इनवाइस जारी किए गए, जिनमें लगभग 9 करोड़ रुपये की जीएसटी शामिल है। यह आंकड़ा प्रारंभिक है और जांच आगे बढ़ने के साथ फर्जीवाड़े की रकम बढ़ने की संभावना जताई गई है।
इस मामले में अमन कुमार अग्रवाल और विक्रम मंधानी को 20 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था। दोनों को 21 दिसंबर को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 2 जनवरी 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।



