रायपुर। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे पूर्व आबकारी अधिकारी निरंजन दास को तीन दिन की ईडी कस्टोडियल रिमांड पूरी होने के बाद मंगलवार को कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें 13 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। अब उनकी न्यायिक रिमांड 3 जनवरी को समाप्त होगी।
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बताया गया कि सौम्या चौरसिया से पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर ईडी ने निरंजन दास से पूछताछ की थी। ईडी के पास कुछ अहम साक्ष्य सामने आए थे, जिनकी पुष्टि के लिए उनसे तीन दिन तक रिमांड पर पूछताछ की गई।
ईडी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सौरभ पांडे ने बताया कि निरंजन दास आबकारी विभाग के शीर्ष अधिकारी रह चुके हैं और आबकारी घोटाले के समय उनकी भूमिका को लेकर जांच चल रही है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय और एंटी करप्शन ब्यूरो दोनों ही एजेंसियां जांच कर रही हैं। एसीबी के प्रकरण में निरंजन दास पहले से ही जेल में हैं। ईडी को जिन साक्ष्यों की पुष्टि करनी थी, वह पूछताछ में पूरी हो चुकी है। फिलहाल जांच में उनकी आगे कस्टोडियल रिमांड की आवश्यकता नहीं होने के चलते न्यायालय से न्यायिक रिमांड की मांग की गई थी। हालांकि ईडी ने 14 दिन की न्यायिक रिमांड मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने 13 दिन की रिमांड मंजूर की।
वहीं निरंजन दास के अधिवक्ता पुरंजय भट्ट ने कहा कि ईडी द्वारा मांगी गई तीन दिन की कस्टोडियल रिमांड आज समाप्त हो गई है और इस दौरान जो भी पूछताछ करनी थी, वह पूरी कर ली गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी के पास निरंजन दास के खिलाफ ठोस और प्रमाणित साक्ष्य नहीं हैं। कस्टडी खत्म होने के बाद उन्हें दोपहर 2:30 बजे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।



