बिलासपुर। गतौरा–बिलासपुर रेल सेक्शन में 4 नवंबर को हुए भीषण ट्रेन हादसे पर मुख्य संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) की प्रारंभिक रिपोर्ट ने रेलवे सिस्टम की गंभीर खामियों और लापरवाहियों का खुलासा किया है। नियमों के अनुसार दुर्घटना के एक मिनट के भीतर कंट्रोलर को सूचना देना अनिवार्य था ताकि हूटर बजाकर तत्काल राहत दल रवाना किए जा सकें, लेकिन इस मामले में 7 मिनट की देरी हुई। परिणामस्वरूप रेस्क्यू ऑपरेशन देर से शुरू हुआ और स्थिति और गंभीर हो गई।
कैसे हुआ हादसा?
4 नवंबर की शाम करीब 4 बजे बिलासपुर–गेवरारोड अप लाइन पर दौड़ रही मेमू ट्रेन खड़ी मालगाड़ी से जा टकराई।
हादसे में लोको पायलट विद्यासागर सहित 13 लोगों की मौत हुई, जबकि 20 से अधिक यात्री घायल हुए।
सीआरएस की जांच के अनुसार, समय पर अलर्ट और तेज रेस्क्यू की स्थिति में कई यात्रियों की जान बचाई जा सकती थी।
सीआरएस रिपोर्ट के चौंकाने वाले निष्कर्ष
सीआरएस ब्रजेश कुमार मिश्रा की 30 पेज की रिपोर्ट में कई गंभीर कमियां दर्ज की गई हैं—
लोको पायलट ने रेड सिग्नल पर ट्रेन नहीं रोकी।
असिस्टेंट लोको पायलट समय पर इमरजेंसी ब्रेक नहीं लगा सकीं।
लोको पायलट चलती ट्रेन में अधिकारियों से फोन पर बातचीत कर रहा था।
हादसे के बाद राहत ट्रेन और मेडिकल वैन भेजने में देरी हुई।
हूटर समय पर न बजने से वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देर से मिली।
सिग्नलिंग, तकनीकी प्रणाली और ट्रेन संचालन प्रक्रियाओं में व्यापक खामियां सामने आईं।
रिपोर्ट में रेलवे की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को कमजोर बताया गया है और इसमें बड़े सुधार की आवश्यकता जताई गई है।
कई अधिकारियों पर गिर सकती है गाज
रिपोर्ट में दर्ज लापरवाहियों को देखते हुए माना जा रहा है कि फाइनल रिपोर्ट आने के बाद संरक्षा और विद्युत विभाग के कई अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हो सकती है।
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है—
सीनियर डीईई और सीनियर सीएसओ को हटाया गया है।
असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज को निलंबित किया गया है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार फाइनल रिपोर्ट रेलवे बोर्ड की समीक्षा के बाद जारी की जाएगी।



