दशहरा 2026: बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक विजयदशमी का पर्व मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरा नए और शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पूजा-अर्चना के साथ खरीदारी करने की भी परंपरा है।
हालांकि, दशहरे पर क्या खरीदना चाहिए और किन वस्तुओं से परहेज करना चाहिए, इसे लेकर अलग-अलग धार्मिक और क्षेत्रीय मान्यताएं प्रचलित हैं। आइए जानते हैं कि विजयदशमी के अवसर पर किन चीजों की खरीदारी शुभ मानी जाती है।
दशहरे पर क्या खरीदना माना जाता है शुभ?
1. सोने-चांदी के आभूषण
दशहरे के दिन सोने-चांदी के आभूषण खरीदना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कीमती धातुओं की खरीदारी समृद्धि, खुशहाली और आर्थिक उन्नति का प्रतीक मानी जाती है। हालांकि, खरीदारी अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार ही करनी चाहिए।
2. वाहन और नए सामान
कई क्षेत्रों में विजयदशमी पर वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और घर के लिए नई वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। इस दिन लोग नए काम की शुरुआत भी करते हैं। मान्यता है कि शुभ अवसर पर शुरू किए गए कार्य में सफलता और उन्नति की कामना की जाती है।
3. पूजा सामग्री और धार्मिक वस्तुएं
दशहरे पर भगवान श्रीराम, मां दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की पूजा के लिए सामग्री खरीदना भी शुभ माना जाता है। लोग पूजा के लिए फूल, दीपक, धूप, मिठाई और अन्य आवश्यक वस्तुएं लाते हैं। कई स्थानों पर शस्त्र पूजन और औजारों की पूजा की भी परंपरा है।
दशहरे पर किन चीजों की खरीदारी से बचने की मान्यता है?
1. काले रंग के कपड़े
कुछ धार्मिक मान्यताओं में दशहरे जैसे शुभ अवसर पर काले रंग के वस्त्र खरीदने या पहनने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। इस दिन लोग अक्सर लाल, पीले और अन्य शुभ माने जाने वाले रंगों के कपड़े पहनना पसंद करते हैं। हालांकि, यह मान्यता सभी क्षेत्रों में समान नहीं है।
2. जूते-चप्पल
कुछ परंपराओं में दशहरे के दिन जूते-चप्पल खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है। इसे लेकर धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग हैं। इसे अशुभ मानने का कोई सार्वभौमिक नियम नहीं है।
3. प्याज और लहसुन
दशहरे पर प्याज और लहसुन की खरीदारी को लेकर भी कुछ मान्यताएं प्रचलित हैं। विशेष रूप से पूजा-पाठ या व्रत से जुड़े खानपान में इनसे परहेज किया जाता है। हालांकि, सामान्य रूप से इनकी खरीदारी को लेकर कोई एक समान धार्मिक नियम नहीं है।
दशहरे पर पूजा और शुभ मुहूर्त का महत्व
विजयदशमी पर भगवान श्रीराम की पूजा, शस्त्र पूजन और रावण दहन प्रमुख परंपराएं हैं। वर्ष 2026 में आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे शुरू होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे तक रहेगी।
दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक और अपराह्न पूजा का समय दोपहर 1:14 बजे से शाम 3:30 बजे तक बताया गया है। उत्तर और मध्य भारत के अधिकांश क्षेत्रों में विजयदशमी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। हालांकि, पूजा के समय में शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है।
रावण दहन कब होगा?
दशहरे की शाम रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। आमतौर पर रावण दहन सूर्यास्त के बाद आयोजित किया जाता है। इसके लिए सटीक समय संबंधित शहर के सूर्यास्त, स्थानीय परंपरा और आयोजन स्थल के कार्यक्रम पर निर्भर करेगा।
ध्यान दें: दशहरे पर वस्तुओं की खरीदारी से जुड़ी बातें धार्मिक और क्षेत्रीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें अनिवार्य नियम न मानें। शुभ अवसर का महत्व पूजा, सदाचार और सकारात्मक संकल्प से भी जुड़ा है।




