Pitru Paksha 2026 : सनातन परंपरा में पितरों यानी पूर्वजों का स्थान बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करने का विशेष अवसर होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सामान्य रूप से जिस तिथि को किसी व्यक्ति का निधन हुआ हो, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर उसका श्राद्ध किया जाता है। हालांकि, पितृ पक्ष में कुछ तिथियों का विशेष महत्व माना गया है। इनमें महाभरणी श्राद्ध, मातृ नवमी और सर्वपितृ अमावस्या प्रमुख हैं। (Pitru Paksha 2026)
महाभरणी श्राद्ध कब है?
भरणी नक्षत्र से संबंध होने के कारण पितृ पक्ष में आने वाली भरणी तिथि को महाभरणी श्राद्ध कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किया गया श्राद्ध विशेष फलदायी माना जाता है।
कई परंपराओं में असामयिक मृत्यु या अविवाहित दिवंगत परिजनों के निमित्त भी इस दिन श्राद्ध करने का उल्लेख मिलता है। किसी परिजन की मृत्यु को एक वर्ष पूरा होने के बाद भी इस तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। (Pitru Paksha 2026)
2026 में महाभरणी श्राद्ध 29 सितंबर, मंगलवार को होगा।
मातृ नवमी: दिवंगत महिला पूर्वजों के लिए विशेष दिन
पितृ पक्ष की नवमी तिथि को मातृ नवमी कहा जाता है। यह दिन परिवार की दिवंगत महिला पूर्वजों की स्मृति और उनके निमित्त श्राद्ध-तर्पण के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन माता, दादी, नानी, बहन या अन्य दिवंगत महिला परिजनों के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य किया जाता है।
यदि किसी महिला पूर्वज की मृत्यु की तिथि ज्ञात न हो, तो धार्मिक परंपराओं में मातृ नवमी पर उनके निमित्त श्राद्ध करने का विधान बताया गया है।
2026 में मातृ नवमी 4 अक्टूबर, रविवार को पड़ेगी।
सर्वपितृ अमावस्या: सभी पितरों के लिए श्राद्ध का दिन
पितृ पक्ष की अंतिम तिथि सर्वपितृ अमावस्या होती है, जिसे महालय अमावस्या भी कहा जाता है। यह पितृ पक्ष का महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।
जिन पूर्वजों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है, या किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो सका है, उनके निमित्त सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। इस दिन सभी पितरों के लिए श्रद्धापूर्वक कर्म किए जा सकते हैं।
2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को होगी।
क्या सिर्फ इन्हीं तीन तिथियों पर श्राद्ध करना चाहिए?
नहीं। पितृ पक्ष में केवल इन तीन तिथियों पर ही श्राद्ध करने का नियम नहीं है। सामान्य परंपरा के अनुसार, जिस तिथि को व्यक्ति का निधन हुआ हो, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर उसका श्राद्ध किया जाता है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति का निधन द्वितीया तिथि को हुआ है, तो पितृ पक्ष की द्वितीया तिथि पर उसका श्राद्ध किया जाएगा। इसी तरह अष्टमी, दशमी या किसी अन्य तिथि पर निधन होने पर उसी तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है।
महाभरणी श्राद्ध, मातृ नवमी और सर्वपितृ अमावस्या का महत्व विशेष परिस्थितियों में बढ़ जाता है। इसलिए इन तिथियों को पितृ पक्ष की महत्वपूर्ण तिथियों में शामिल किया जाता है।
पितृ पक्ष 2026 का पूरा कैलेंडर
- पूर्णिमा श्राद्ध: 26 सितंबर 2026, शनिवार
- प्रतिपदा श्राद्ध: 27 सितंबर 2026, रविवार
- द्वितीया श्राद्ध: 28 सितंबर 2026, सोमवार
- तृतीया एवं महाभरणी श्राद्ध: 29 सितंबर 2026, मंगलवार
- चतुर्थी एवं पंचमी श्राद्ध: 30 सितंबर 2026, बुधवार
- षष्ठी श्राद्ध: 1 अक्टूबर 2026, गुरुवार
- सप्तमी श्राद्ध: 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
- अष्टमी श्राद्ध: 3 अक्टूबर 2026, शनिवार
- नवमी/मातृ नवमी श्राद्ध: 4 अक्टूबर 2026, रविवार
- दशमी श्राद्ध: 5 अक्टूबर 2026, सोमवार
- एकादशी श्राद्ध: 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार
- द्वादशी एवं मघा श्राद्ध: 7 अक्टूबर 2026, बुधवार
- त्रयोदशी श्राद्ध: 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार
- चतुर्दशी श्राद्ध: 9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
- सर्वपितृ अमावस्या: 10 अक्टूबर 2026, शनिवार
नोट: श्राद्ध की तिथि और विधि स्थानीय पंचांग, स्थान और तिथि-निर्णय की परंपरा के अनुसार कुछ मामलों में अलग हो सकती है। धार्मिक कर्मकांड के लिए स्थानीय पंचांग या विद्वान आचार्य की सलाह लेना उचित है।




