जगदलपुर। बस्तर के जंगलों में नक्सली संगठन की अंदरूनी व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। हाल ही में आत्मसमर्पण कर चुके 8 लाख रुपये के इनामी पूर्व DVCM शंकर मुचाकी ने दावा किया है कि नक्सली संगठन में शादी से पहले पुरुष कैडरों की नसबंदी कराई जाती थी, और इसके लिए प्रशिक्षित डॉक्टरों की बजाय गांव के कम पढ़े-लिखे युवाओं का इस्तेमाल किया जाता था।
शंकर मुचाकी उन 34 पूर्व नक्सलियों में शामिल हैं, जिनकी हाल ही में जगदलपुर स्थित महारानी अस्पताल में नसबंदी रिवर्सल सर्जरी की गई है। ये सभी सरेंडर के बाद सामान्य जीवन की ओर लौटने और परिवार बसाने की कोशिश में हैं।
जंगलों में चलती थी “अनौपचारिक सर्जरी व्यवस्था”
शंकर मुचाकी ने बताया कि वर्ष 2014 के आसपास झारखंड से आए एक व्यक्ति डॉक्टर रफीक ने स्थानीय युवाओं को नसबंदी और छोटे ऑपरेशन की ट्रेनिंग दी थी। इसके बाद यह काम जंगलों के भीतर ही किया जाने लगा।
उनका दावा है कि यह काम करने वाले अधिकतर युवक 8वीं से 10वीं पास ग्रामीण थे, जिनके पास किसी प्रकार की मेडिकल डिग्री नहीं थी। बावजूद इसके, संगठन के भीतर बनाए गए ढांचे के तहत ये युवक नसबंदी जैसे ऑपरेशन करते थे।
शंकर के अनुसार, संगठन के पास आवश्यक उपकरण और दवाइयां पहले से उपलब्ध रहती थीं, और जब भी किसी नक्सली को शादी करनी होती थी, तो इन्हीं प्रशिक्षित युवाओं को बुलाकर नसबंदी कराई जाती थी।
शादी से पहले नसबंदी अनिवार्य
पूर्व नक्सली के मुताबिक, नक्सली संगठन में शादी करने से पहले पुरुष कैडर की नसबंदी अनिवार्य होती थी। संगठन का तर्क होता था कि परिवार और बच्चों के कारण लड़ाके अपने कर्तव्यों से भटक सकते हैं और आंदोलन कमजोर पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि शादी की अनुमति वरिष्ठ कैडर से मिलती थी, और कई मामलों में महिला और पुरुष दोनों कैडर संगठन में ही विवाह करते थे।
शंकर मुचाकी ने स्वीकार किया कि उन्होंने भी संगठन में रहते हुए शादी से पहले नसबंदी कराई थी और करीब 17 साल तक सक्रिय नक्सली के रूप में काम किया।
“जंगल में ही हुआ ऑपरेशन”
सबसे गंभीर दावा यह है कि शंकर के अनुसार उनकी नसबंदी किसी अस्पताल में नहीं बल्कि बीजापुर जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र के जंगलों में की गई थी। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह अस्थायी व्यवस्था के तहत गांव के युवाओं द्वारा की गई थी।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी साथी की मौत या गंभीर जटिलता की जानकारी उनके पास नहीं है।
आत्मसमर्पण के बाद बदला जीवन
शंकर मुचाकी ने मार्च 2026 में नक्सली नेता पापा राव के साथ आत्मसमर्पण किया था। उन्होंने बताया कि संगठन में रहते हुए उन्हें अपने व्यक्तिगत जीवन और पिता बनने की इच्छा को दबाना पड़ा।
अब सरेंडर के बाद उन्होंने अपनी नसबंदी रिवर्सल सर्जरी करवाई है और सामान्य जीवन जीने की उम्मीद जता रहे हैं।
अन्य पूर्व नक्सली की भी कहानी
इसी तरह पूर्व नक्सली लीडर हूंगा ने बताया कि संगठन में शादी की अनुमति तो मिलती थी, लेकिन पहले नसबंदी कराना अनिवार्य शर्त होती थी। उन्होंने बताया कि उनकी भी नसबंदी 2022 में कराई गई थी, और अब आत्मसमर्पण के बाद वे इसे रिवर्स कराकर परिवार बसाने की तैयारी कर रहे हैं।
गंभीर सवाल
यह खुलासे नक्सली संगठन की कार्यप्रणाली, मानवाधिकार और अवैध चिकित्सकीय गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि बिना योग्य चिकित्सा विशेषज्ञों के ऐसे ऑपरेशन किस स्तर तक और किस व्यवस्था के तहत कराए जाते थे।