रायपुर/सरगुजा। छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक तंत्र और जनप्रतिनिधियों के बीच तनाव एक बड़े टकराव में बदल गया है। सीतापुर से भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो पर नायब तहसीलदार से मारपीट के आरोप के बाद प्रदेशभर में 500 से अधिक तहसीलदारों ने हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। इसके चलते रायपुर, रायगढ़ और सरगुजा सहित कई जिलों में राजस्व से जुड़े कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं।
विवाद की जड़: उप तहसील में फाइल से शुरू हुआ टकराव
पूरा मामला सरगुजा जिले के मैनपाट स्थित राजापुर उप तहसील का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो की चचेरी बहन सीमा धनकी ने जमीन से जुड़े एक दस्तावेज के लिए 14 मई को फाइल जमा की थी। आरोप है कि फाइल के निपटारे में देरी और कार्यालय में कथित व्यवहार को लेकर विवाद बढ़ गया।
नायब तहसीलदार तुषार मानिक पर आरोप है कि उन्होंने फाइल को लेकर अभद्र व्यवहार किया, जबकि दूसरी ओर तुषार मानिक का कहना है कि उनसे राजनीतिक दबाव बनाकर तत्काल हस्ताक्षर कराने की कोशिश की गई।
विधायक और नायब तहसीलदार आमने-सामने
मामला तब गंभीर हो गया जब 27 मई की शाम विधायक रामकुमार टोप्पो अपने समर्थकों के साथ उप तहसील कार्यालय पहुंचे। आरोप है कि वहां बहस के बाद विवाद बढ़ा और नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ मारपीट की गई।
नायब तहसीलदार ने आरोप लगाया कि विधायक और उनके समर्थकों ने उन्हें घेरकर पीटा। वहीं विधायक पक्ष का कहना है कि नायब तहसीलदार ने फाइल फेंकी और महिला के साथ बदसलूकी की, जिसके बाद विवाद हुआ।
FIR दोनों पक्षों पर, मामला दर्ज
इस पूरे मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर काउंटर FIR दर्ज की है। नायब तहसीलदार की शिकायत पर विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों पर BNS की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है, जबकि विधायक पक्ष की शिकायत पर नायब तहसीलदार के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, विधायक पक्ष पर शासकीय कार्य में बाधा और मारपीट जैसी धाराएं लगाई गई हैं, वहीं तहसीलदार पर महिलाओं से जुड़े अपराध और धमकी के आरोप दर्ज किए गए हैं।
तहसीलदारों का प्रदेशव्यापी विरोध
घटना के बाद प्रशासनिक महकमे में नाराजगी फैल गई है। प्रदेशभर के तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने कामकाज ठप कर विरोध शुरू कर दिया है। अधिकारियों की मांग है कि विधायक पर तत्काल गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाए।
हड़ताल के कारण राजस्व विभाग का कामकाज प्रभावित हुआ है और कई जिलों में जमीन, प्रमाण पत्र और अन्य प्रशासनिक कार्य रुके हुए हैं।
राजनीतिक घमासान तेज
इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस ने इसे “सत्ता का दुरुपयोग” बताते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा है, वहीं भाजपा ने मामले को जांच का विषय बताया है।
पूर्व उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि अगर FIR दर्ज हुई है तो घटना जरूर गंभीर है और चुने हुए प्रतिनिधियों को मर्यादा में रहकर कार्य करना चाहिए।
प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर तहसीलदारों का आक्रोश है, तो दूसरी ओर जनप्रतिनिधि और प्रशासन आमने-सामने हैं। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।