Women Reservation Bill 2026 : नरेंद्र मोदी सरकार ने गुरुवार (16 अप्रैल 2026) को संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण, परिसीमन और संविधान संशोधन से जुड़े तीन अहम विधेयक सदन के पटल पर रखे। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, इन विधेयकों के पारित होने के बाद इन्हें वर्ष 2029 से लागू किया जा सकता है।
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सरकार का उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना है। वहीं, संविधान के 131वें संशोधन के तहत सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव भी शामिल है, जिसे लेकर सियासी बहस तेज हो गई है।
विपक्ष का विरोध, एकजुटता पर सवाल
विधेयकों को लेकर विपक्षी दलों ने विरोध का रुख अपनाया है। हालांकि, विपक्ष की संख्या मजबूत होने के बावजूद आपसी एकजुटता के स्पष्ट संकेत नहीं मिल रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन परिसीमन से जुड़े प्रावधानों का विरोध करती है।
खड़गे के आवास पर हुई बैठक में राहुल गांधी सहित कई प्रमुख विपक्षी नेता मौजूद रहे। टीएमसी, डीएमके, वाम दल, जेएमएम, आरजेडी और आम आदमी पार्टी समेत कई दलों ने इस प्रस्ताव को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया है।
विशेष बहुमत की चुनौती
संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किसी भी संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दोनों सदनों में विशेष बहुमत आवश्यक होता है—यानी कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित सदस्यों का दो-तिहाई समर्थन।
लोकसभा में वर्तमान में 540 सदस्य हैं, ऐसे में विधेयक पारित करने के लिए 360 सांसदों का समर्थन जरूरी होगा। एनडीए के पास करीब 293 सांसद हैं, जो बहुमत से कम है। विपक्ष के पास 230 से अधिक सांसद हैं, जिससे विधेयक पारित कराने के लिए सरकार को अन्य दलों के समर्थन या अनुपस्थिति की रणनीति पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
राज्यसभा में भी कड़ा मुकाबला
राज्यसभा में एनडीए के पास लगभग 141 सदस्य हैं, जबकि विपक्ष के पास 80 से अधिक सांसद हैं। बीआरएस, वाईएसआरसीपी, बीजद और बसपा जैसे दलों की भूमिका यहां निर्णायक हो सकती है।
दक्षिण बनाम उत्तर का मुद्दा
विपक्ष का कहना है कि परिसीमन के बाद अधिक आबादी वाले उत्तरी राज्यों को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलेगा, जिससे दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान हो सकता है। (Women Reservation Bill 2026)
पीएम मोदी की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से इन विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे का विरोध करने वालों को भविष्य में राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। ()Women Reservation Bill 2026



