जशपुर :- 17 फरवरी, 2026 छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रहे अभियान के तहत शासन ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। जशपुर में पदस्थापना के दौरान प्रशिक्षण शुल्क के बदले रिश्वत की मांग करने वाले श्रम निरीक्षक सुरेश कुर्रे को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई माननीय विशेष न्यायालय द्वारा उन्हें दोषी करार देते हुए 3 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद की गई है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला साल 2019 का है। जशपुर जिले में स्थित ‘छत्तीसगढ़ अभिनंदन एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी, कोतबा’ के संचालक रमेश कुमार यादव ने 320 युवाओं को ‘मेशन जनरल’ और ‘असिस्टेंट इलेक्ट्रीशियन’ कोर्स का प्रशिक्षण दिया था। नियमानुसार, इस प्रशिक्षण कार्य के बदले संस्था को शासन से प्रशिक्षण शुल्क प्राप्त होना था।आरोप है कि तत्कालीन श्रम निरीक्षक सुरेश कुर्रे ने इस भुगतान की फाइल को आगे बढ़ाने के एवज में रिश्वत की मांग की। भ्रष्टाचार से तंग आकर संस्था के संचालक ने 26 सितंबर 2019 को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) बिलासपुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
ACB का जाल और अपराध दर्ज
शिकायत की पुष्टि होने के बाद, एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 एवं संशोधित अधिनियम 2018 के तहत अपराध क्रमांक 25/2019 पंजीबद्ध किया। जांच में पाया गया कि आरोपी अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए प्रार्थी को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया था।
कोर्ट का फैसला: जेल और भारी जुर्माना
विशेष प्रकरण क्रमांक 01/2021 की लंबी सुनवाई के बाद, माननीय विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), जशपुर ने 26 नवंबर 2025 को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुरेश कुर्रे को दोषी पाया गया और कोर्ट ने उन्हें 03 वर्ष का कठोर कारावास 50,000/- रुपये का अर्थदंड (जुर्माना) की सजा सुनाई।
तत्काल प्रभाव से बर्खास्तगी
न्यायालय के इस फैसले के बाद श्रम विभाग ने भी अपना डंडा चलाया है। श्रमायुक्त कार्यालय, छत्तीसगढ़ (नवा रायपुर) ने आदेश क्रमांक-ESTB-1024/1053/2025 (दिनांक 15.01.2026) जारी कर सुरेश कुर्रे को शासकीय सेवा से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। बर्खास्तगी के समय वे जिला कोण्डागांव में पदस्थ थे।



