रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला के सतत मॉनिटरिंग और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (एसीसीयू) की सजगता से रायपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में हुई 8 चोरी की घटनाओं का खुलासा हुआ है। पुलिस ने कुल 7 आरोपियों (जिनमें एक बालक विधि के साथ संघर्षरत है) को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से चोरी का सोना-चांदी के जेवरात, नगदी और मोटरसाइकिल सहित लगभग 28 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की है।
गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया रील्स देखकर ज्वेलरी दुकानों में चोरी करने की तकनीक अपनाते थे। वे ग्राहक बनकर दुकान में प्रवेश करते, जेवरात दिखाने के बहाने हाथ में लेकर फरार हो जाते थे। घरेलू चोरियों में भी ताला तोड़कर या सूने मकानों को निशाना बनाते थे।
खुलासा हुए प्रमुख प्रकरण
थाना खम्हारडीह एवं डीडी नगर: परिवार दिल्ली घूमने गया था, घर से 1.50 लाख के जेवरात-नगदी चोरी।
थाना डीडी नगर: देवघर गए परिवार के घर से 57,225 के सोने के जेवरात और 30,000 नगदी चोरी।
थाना पुरानी बस्ती: खैरागढ़ गए परिवार के घर से 95,000 के जेवरात-नगदी गायब।
थाना पंडरी: दुकान के बाहर खड़ी बाइक (पैशन प्रो) चोरी।
थाना आरंग: दो ज्वेलरी दुकानों (सुरेश ज्वेलर्स और श्री सांई ज्वेलर्स) से सोने के लॉकेट चोरी।
थाना पलारी (बलौदा बाजार): दिलीप ज्वेलर्स से मंगलसूत्र चोरी का प्रयास, फेंककर भागा।
थाना विधानसभा: शादी में गए परिवार के घर से 1.10 लाख के जेवरात-नगदी चोरी।
गिरफ्तार आरोपी और बरामदगी
संजय नेताम उर्फ गोलू (43 वर्ष, निवासी: इंद्रप्रस्थ कॉलोनी, डीडी नगर) – थाना सिविल लाइन का हिस्ट्रीशीटर और शातिर चोर। खम्हारडीह-डीडी नगर प्रकरण में मुख्य आरोपी। कब्जे से 18 लाख मूल्य की संपत्ति (जेवरात, बाइक, नगदी) बरामद।
भूपेंद्र पटेल उर्फ गजनी (25 वर्ष) और करण टांडी (24 वर्ष) – पुरानी बस्ती प्रकरण में। 2 लाख मूल्य की बरामदगी।
प्रमोद कुमार चतुर्वेदी (22 वर्ष), रितेश कुर्रे (20 वर्ष) और एक बालक – आरंग, पंडरी, पलारी प्रकरणों में। 5 लाख मूल्य की जेवरात और बाइक बरामद।
रुद्रांश श्रीवास्तव (22 वर्ष) – विधानसभा प्रकरण में। 3 लाख मूल्य की बरामदगी।
पुलिस की कार्रवाई
वरिष्ठ अधिकारियों – पुलिस उपायुक्त (क्राइम) स्मृतिक राजनाला, पुलिस उपायुक्त (नॉर्थ जोन) मयंक गुर्जर और पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) संदीप पटेल के निर्देश पर 6 अलग-अलग टीमें गठित की गईं। घटनास्थलों का निरीक्षण, सीसीटीवी फुटेज विश्लेषण, मुखबिरों की मदद और तकनीकी सर्विलांस से आरोपियों की पहचान हुई।




