रायपुर। AIUTUC से संबद्ध छत्तीसगढ़ मितानिन-आशा यूनियन और संघर्षशील आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका यूनियन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राजधानी रायपुर के राजीव गांधी चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया और नारेबाजी के जरिए सरकार के खिलाफ आक्रोश जताया। मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई।
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AIUTUC के राज्य प्रभारी विश्वजीत हारोडे ने कहा कि शासन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और मितानिनों को स्वयंसेवी और मानसेवी बताकर उनके लिए वेतन संबंधी कोई कानून लागू नहीं करता। न इनके लिए वेतन का कानून है, न वार्षिक वृद्धि, न डीए, न पीएफ, न ग्रेच्युटी और न ही पेंशन। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश में तीन करोड़ से अधिक स्वयंसेवी/मानसेवी कर्मचारी हैं और वे शासन का काम कर जनता की सेवा कर रहे हैं, तो उनके लिए कानून क्यों नहीं बनाया गया।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी योजना 1975 से संचालित है, लेकिन आज भी कार्यकर्ता को मात्र 10 हजार और सहायिका को 5 हजार रुपए मासिक मानदेय मिलता है। यह राशि न्यूनतम मजदूरी से भी कम है। सहायिका को तो न्यूनतम वेतन का एक तिहाई भी नहीं मिल रहा। उन्होंने सम्मानजनक वेतन और पेंशन लागू करने की मांग की।
संघर्षशील आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका यूनियन की अध्यक्ष कल्पना चंद ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में काम का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले की तुलना में तीन से चार गुना अधिक कार्य कराया जा रहा है और आठ घंटे से अधिक काम करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को कर्मचारी मानते हुए ग्रेच्युटी देने का आदेश दिया था, लेकिन सरकार ने इसे लागू नहीं किया।
उन्होंने कहा कि गुजरात हाईकोर्ट ने 2024 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को तृतीय श्रेणी और सहायिका को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी घोषित करने का आदेश दिया था, जिसे लागू नहीं किया गया। इसके बाद 2025 में हाईकोर्ट ने कार्यकर्ता को 24,800 और सहायिका को 20,300 रुपए मासिक वेतन देने का आदेश दिया, जिसे भी नजरअंदाज किया गया। उन्होंने मांग की कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए और तब तक कार्यकर्ता को 24 हजार व सहायिका को 21 हजार रुपए मानदेय दिया जाए।
मितानिन यूनियन की ओर से बबीता सोना, नीरा देवी, ममता एक्का और मीरा मंडल ने कहा कि मितानिनों को जीने लायक सम्मानजनक मानदेय दिया जाए। राज्य सरकार द्वारा दिया जाने वाला मानदेय 2200 रुपए से बढ़ाकर 10 हजार रुपए प्रतिमाह किया जाए। राज्यांश 75 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत किया जाए और दावापत्र के सभी बिंदुओं पर भुगतान हो।
उन्होंने ₹1100 वृद्धि की घोषणा को तत्काल लागू करने और इसमें और बढ़ोतरी करने, प्रोत्साहन राशि को कम से कम दोगुना करने, मानदेय एकमुश्त भुगतान कर प्रत्येक माह की 6 तारीख तक खाते में जमा करने की मांग की। साथ ही मितानिनों की ऑनलाइन पासबुक व्यवस्था दुरुस्त करने, केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाई गई प्रोत्साहन राशि के अनुरूप नया दावापत्र जारी करने और रिटायरमेंट के बाद 5 लाख रुपए देने की भी मांग रखी गई।



