पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर/छत्तीसगढ़. छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग द्वारा 1 अप्रैल 2023 से पुराने वाहनों की खरीदी-बिक्री के लिए नए नियम लागू किए गए थे। जिसके तहत राज्य में सेकेंड हैंड गाड़ियों की खरीदी-बिक्री के लिए परिवहन विभाग से ट्रेड लाइसेंस लेना अनिवार्य किया गया था। परंतु छत्तीसगढ़ का परिवहन विभाग अपने ही सर्कुलर की धज्जियां उड़ा रहा है। क्योंकि नियमानुसार सभी प्रक्रियाओं के पालन करने से विभाग की लाखों करोड़ों की अवैध कमाई बंद हो जायेगी।
सेकेंड हैंड व्हीकल मर्चेंट एसोसिएशन के एक पूर्व पदाधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त में इस धंधे के स्याह चहरे की परतें खोल दी। उन्होंने रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 न्यूज चैनल की टीम को बताया कि ” छत्तीसगढ़ सहित राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में पूरे धंधे को कांकेर ग्रुप कब्जा कर चला रहा है। उनको धंधे के लिए फंडिंग दुबई सहित पाकिस्तान के बड़े व्यापारियों से हवाला के जरिए हो रही है। क्योंकि सेकेंड हैंड व्हीकल को एकमुश्त भुगतान कर खरीदा जाता है और डिस्पले किया जाता है जिसमें पैसा और जगह दोनों ज्यादा लगती है। इससे आप समझ सकते हैं कि इन्वेस्टमेंट ज्यादा है और प्रॉफिट भी बड़ा बनाया जाता है।”
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर खुलासा यह हुआ कि व्हीकल फाइनेंस कंपनीयों द्वारा भी बड़ी धांधली की जाती है। उनके द्वारा फार्म – 36 का उपयोग नहीं किया जाता है। सीधे फार्म – 29 और 30 का उपयोग कर किश्त ना चुका पाने वाले ग्राहकों से गाड़ी खींच कर बड़े और रसूखदार ओल्ड व्हीकल मर्चेंट को सीधे बेच दी जाती है और फाइनेंस की गई बची हुई रकम को खातों में जमा कर कंपनी की बैलेंस शीट को साफ़ सुथरा कर लिया जाता है।

फार्म – 36 परिवहन विभाग का एक आवेदन पत्र है जिसका उपयोग तब किया जाता है जब कोई वाहन मालिक ऋण चुकाने में डिफॉल्ट करता है और वित्तपोषक (जैसे बैंक या फाइनेंस कंपनी) वाहन का कब्ज़ा ले लेता है। यह फॉर्म वित्तपोषक द्वारा नए पंजीकरण प्रमाण पत्र ( आर.सी. बुक )के लिए आवेदन करने के लिए भरा जाता है, जिसमें मूल आर. सी. को रद्द करने और वाहन को वित्तपोषक के नाम पर पंजीकृत करने का अनुरोध किया जाता है, यह तब होता है जब मूल मालिक आर.सी. देने से मना कर देता है या फरार हो जाता है।

मघ्यप्रदेश में 1 जनवरी 2026 से पुराना वाहन बेचने के लिए ऑथराइज्ड डीलर अनिवार्य
इस पूरे मामले में मघ्यप्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मोटरयान नियम, 1989 में नए प्रावधानों पर अमल करते हुए पुराने वाहनों के लेन-देन को केवल ऑथराइज्ड डीलरों तक सीमित कर दिया गया है। नए नियमों के अनुसार 1 जनवरी 2026 से बिना पंजीकरण या अनुमति पुराने वाहनों की खरीदी-बिक्री पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने वर्ष 2022 में जारी अधिसूचना के जरिए केंद्रीय मोटरयान नियम, 1989 में नियम 55A से 55H को शामिल किया था। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य पुराने वाहनों के कारोबार में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा था।
मघ्यप्रदेश में नए प्रावधानों के तहत कोई भी वाहन स्वामी अब अपना पुराना वाहन सीधे किसी व्यापारी को जो पुराने वाहनों की खरीदी-बिक्री का व्यवसाय करता है नहीं बेच सकेगा। वाहन बिक्री केवल उन मान्यता प्राप्त डीलर के माध्यम से ही होगी, जिसे परिवहन विभाग से ऑथराइजेशन और ट्रेड लाइसेंस प्राप्त होगा।

वाहन स्वामी को बिक्री से पहले केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित फॉर्म 29C के जरिए संबंधित आर.टी.ओ को पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही दस्तावेज अपडेट रखने की जिम्मेदारी भी डीलर की ही होगी।

वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य में 95% से ज्यादा ओल्ड व्हीकल डीलर बिना पंजीयन और ट्रेड लाइसेंस के काम कर रहे हैं, जिससे राज्य शासन को 18 प्रतिशत जी.एस.टी और 1 प्रतिशत टी.सी.एस का नुकसान हो रहा है।



