पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक )
रायपुर/छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग द्वारा 1 अप्रैल 2023 से पुराने वाहनों की खरीदी-बिक्री के लिए नए नियम लागू किए गए थे। जिसके तहत सेकेंड हैंड गाड़ियों की खरीदी-बिक्री के लिए परिवहन विभाग से ट्रेड लाइसेंस लेना अनिवार्य है। लेकिन इसके बावजूद राज्य भर में सैकड़ों डीलर बिना ट्रेड लाइसेंस लिए ही गाड़ियों की अवैध रूप से खरीदी-बिक्री कर रहे हैं। इससे ना सिर्फ शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व की हानि हो रही है बल्कि इन पुराने वाहनों का उपयोग राज्य के कई इलाकों में अपराध में भी किया जा रहा है। जिसमें अवैध शराब और गांजा तस्करी सहित लूटपाट और यहां तक हत्या में भी प्रयुक्त होते बहुत सारे मामले सामने आये है।

मोटरयान अधिनियम में किया गया था बड़ा बदलाव
सेकेंड हैंड गाड़ी की खरीद-बिक्री के फायदे को ध्यान में रखते हुए इसे पारदर्शी बनाने के लिए छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग द्वारा केंद्र सरकार को सेकेंड हैंड गाड़ी विक्रेता को भी डीलर के रूप में अधिकृत करने पत्राचार सहित अनुरोध राज्य की पुरानी कांग्रेस सरकार ने किया था। इस पर केंद्रीय मोटरवाहन अधिनियम 1989 में बदलाव किया गया था, यह नया नियम 1 अप्रैल, 2023 से लागू हो गया था।

मंशा थी कि डीलर के पास कानूनी रूप से रहेगा स्टाक और पारदर्शिता से होगा व्यवसाय
पूर्ववर्ती सरकार की इस को लागू करने के लिए स्पष्ट मंशा थी कि ये पूरा व्यवसाय और व्यवस्था पारदर्शिता पूर्वक रहें। परिवार विभाग से डीलरशिप लेने के बाद सेकेंड हैंड वाहन डीलर अब क्रेता से गाड़ी खरीद कर कानूनी रूप से अपने पास स्टाक में रख सकेगा और जरूरत के अनुसार उस गाड़ी के समस्त कार्य जैसे-नवीनीकरण या पंजीयन प्रमाणपत्र के नवीनीकरण अथवा पंजीयन प्रमाणपत्र की दूसरी प्रति, अनापत्ति प्रमाणपत्र, बीमा या वाहन के स्वामित्व में अंतरण करने हेतु आवेदन देने के लिए सक्षम होगा।

अपराध और धोखाधड़ी पर लगती लगाम
सरकार की मंशा थी कि अधिकार प्रमाणपत्र से पंजीकृत वाहनों के डीलरों/मध्यस्थों की पहचान करने और उन्हें सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा ऐसे वाहनों की खरीद-बिक्री में धोखाधड़ी की गतिविधियों और इनके अपराधों में शामिल होने से पर्याप्त सुरक्षा हो सकेगी। नए नियम एक अप्रैल 2023 से छत्तीसगढ़ में लागू किए जा चुके थे।
केन्द्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने किसी भी पुराने वाहनों के डीलर की प्रामाणिकता की पहचान करने की खातिर पंजीकृत वाहनों के डीलरों के लिए अधिकार प्रमाणपत्र पेश किया था। केन्द्रीय मंत्रालय सहित तात्कालिक राज्य सरकार के इस कदम से व्यापार करने में आसानी और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा ऐसी पूरी योजना थी। केन्द्रीय मंत्रालय और तात्कालिक राज्य सरकार ने पुराने वाहनों के बाजार संबंधी एक व्यापक नियामक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम, 1989 के अध्याय तीन में संशोधन किया था।
इस बारे में दिसंबर 2022 को सरकार द्वारा अधिसूचना जारी की गई थी। अधिसूचना के मुताबिक पंजीकृत मालिक और डीलर के बीच वाहन की डिलीवरी की सूचना देने की प्रक्रिया को विस्तृत किया गया था और पंजीकृत वाहनों के कब्जे वाले डीलर की शक्तियों और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया गया था। भारत में पुराने वाहनों का बाजार पिछले 10 सालों पैर जमा चुका है है। हाल के वर्षों में पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री करने वाले ऑनलाइन मार्केट प्लेस भी शुरू होने से इस बाजार को और बढ़ावा मिला है। अधिसूचना के मुताबिक, अब डीलरों को अपने कब्जे वाले मोटर वाहनों के लिए पंजीयन प्रमाणपत्र के नवीकरण, फिटनेस प्रमाणपत्र के नवीकरण, डुप्लीकेट पंजीकरण प्रमाण पत्र, एनओसी, स्वामित्व के हस्तांतरण के लिए आवेदन करने का अधिकार दिया गया है।
हाल ही में बंगाल सरकार ने इस्तेमाल किए गए वाहनों के खरीदारों से अपील जारी की है कि कोई भी खरीदारी करने से पहले हमेशा यह सुनिश्चित कर लें कि तृतीय-पक्ष डीलरों के पास वैध लाइसेंस हैं या नहीं। यह सलाह बंगाल परिवहन विभाग को सैकड़ों व्यक्तियों से मिली कई शिकायतों के बाद जारी की गई है, जिन्होंने अपने वाहन बेच दिए थे लेकिन फिर भी उन्हें यातायात नियमों के उल्लंघन के नोटिस मिल रहे थे। बंगाल परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया था कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि स्वामित्व हस्तांतरण की प्रक्रिया संभवतः ठीक से पूरी नहीं हुई थी।
छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग के एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यदि कोई व्यक्ति किसी तीसरे पक्ष से (जो प्रत्यक्ष विक्रेता नहीं है) प्रयुक्त वाहन खरीद रहा है, तो जांच लें कि क्या उस संस्था के पास पुराने वाहनों के डीलर के रूप में लाइसेंस है। जब तीसरे पक्ष के पास वैध लाइसेंस होता है, तो राज्य सरकार के रिकॉर्ड के माध्यम से लेन-देन का पता लगाया जा सकता है। अन्यथा विभाग के पास इन सौदों को ट्रैक करने का कोई तरीका नहीं है।”
बंगाल में यह मुद्दा तब सामने आया जब वाहन विक्रेताओं को विभिन्न राज्यों की पुलिस से उन उल्लंघनों के लिए नोटिस मिलने लगे जो उन्होंने कभी नहीं किए थे। कुछ मामलों में, पूर्व मालिकों को बिहार पुलिस से पत्र मिले, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनके बेचे गए वाहनों का इस्तेमाल शराब तस्करों द्वारा शुष्क राज्य में अवैध शराब के परिवहन के लिए किया जा रहा था।
इस पूरे मामले में बंगाल और बिहार के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बिना लाइसेंस वाले डीलरों के माध्यम से बेचे गए वाहनों से जुड़े अपराधों की जांच में कठिनाई आ रही है। उचित दस्तावेज़ों के अभाव में लेन-देन का पता नहीं लगाया जा सकता है और कुछ विक्रेताओं ने तो बिक्री से पूरी तरह इनकार कर दिया है। जिससे पुलिस को यह साबित करना मुश्किल हो रहा है कि कोई वित्तीय लेन-देन हुआ था।
इस पूरे मामले में जब रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 डिजिटल न्यूज चैनल ने छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग के अतिरिक्त परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर, आई.पी.एस से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि “यदि विभाग को कोई ऐसी सूचना प्राप्त होती है तो उस पर विस्तृत जांच करवाई जायेगी।”
जहां क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, रायपुर आशीष देवांगन और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, बिलासपुर विनय सोनी ने फोन ही नहीं उठाया। वहीं क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, बस्तर दुलीचंद बंजारे ने कहा कि ” आप के माध्यम से यह खामी सामने आई है, मैं इसकी जांच करवा लेता हूं।”



