रायपुर : मेडिकल कॉलेजों की मान्यता में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और हेरफेर के आरोपों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच तेज कर दी है। 27 नवंबर को एजेंसी ने छत्तीसगढ़ के रावतपुरा मेडिकल कॉलेज सहित आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में संचालित कई निजी मेडिकल कॉलेजों पर छापेमारी कर डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं।
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ED की तकनीकी टीम जब्त मोबाइल फोन, DVR, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल डेटा की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई मेडिकल कॉलेजों की मान्यता निरीक्षण के दौरान हुए फर्जीवाड़े, गोपनीय जानकारी लीक होने और रिश्वतखोरी के मामलों की जांच के तहत की गई है।
CBI की AC-III शाखा, नई दिल्ली की FIR के आधार पर शुरू की गई इस जांच में खुलासा हुआ था कि निरीक्षण से पहले ही स्वास्थ्य मंत्रालय और NMC से जुड़े कुछ अधिकारी गोपनीय जानकारी निजी कॉलेजों तक पहुंचा देते थे। इसके बाद कॉलेज फर्जी तैयारियां कर निरीक्षण टीम को गुमराह करते थे।
कई कॉलेजों में निरीक्षण के दिन फर्जी मरीज भर्ती दिखाए गए, घोस्ट फैकल्टी तैनात की गई और अस्पताल की क्षमता बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई। इस पूरी प्रक्रिया में बिचौलियों का एक मजबूत नेटवर्क शामिल था, जो कॉलेजों और अधिकारियों के बीच रिश्वत के लेन-देन में अहम भूमिका निभाता था।
रायपुर में छापेमारी के दौरान ED ने रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी से पूछताछ भी की। तिवारी को पहले CBI गिरफ्तार कर चुकी है और वह फिलहाल जमानत पर बाहर है। आरोप है कि कॉलेज की सीटें बढ़ाने के लिए किए गए लेनदेन में हवाला का इस्तेमाल किया गया था, जिससे मामला मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में आया और ED की एंट्री हुई।
30 जून 2025 को रावतपुरा मेडिकल कॉलेज में NMC के तीन डॉक्टर—डॉ. मंजप्पा सीएन, डॉ. चैत्रा एमएस और डॉ. अशोक शेलके—ने निरीक्षण किया था, जब कॉलेज की क्षमता 150 सीट थी। FIR में यह भी आरोप है कि निरीक्षण टीमों को कुछ मामलों में रिश्वत दी गई और पूरे नेटवर्क ने मान्यता प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेजों व तैयारियों का सहारा लिया।
ED अब बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन और डिजिटल डेटा की जांच कर रही है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि कितने मेडिकल कॉलेज इस फर्जीवाड़े में शामिल थे और हवाला के जरिए कितना पैसा लेन-देन हुआ



