रायपुर। हेट स्पीच के एक मामले में आरोपी अमित बघेल की अब तक गिरफ्तारी न होने को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, बघेल की गिरफ्तारी में देरी पर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएँ तेज हैं। खास तौर पर तब जब यह स्पष्ट है कि उच्च न्यायालय ने न तो गिरफ्तारी पर रोक लगाई है और न ही आरोपी को किसी प्रकार की राहत प्रदान की है।
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उच्च न्यायालय से नहीं मिली कोई राहत
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया और कुछ हलकों में फैलाई जा रही इस सूचना में कोई आधार नहीं है कि आरोपी को अदालत से किसी तरह की राहत मिली है। हाईकोर्ट ने न तो गिरफ्तारी रोकने का आदेश दिया है, न ही किसी प्रकार की अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। ऐसे में गिरफ्तारी न होना पुलिस की भूमिका और सक्रियता पर सवाल खड़े कर रहा है।
सवाल—क्या कार्रवाई किसी दबाव में अटकी हुई है?
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, संवेदनशील मामले में पुलिस की धीमी कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है। सूत्रों का मानना है कि किसी प्रभावशाली वर्ग या व्यक्ति के दबाव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, जिसके कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। हालांकि पुलिस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस की कानूनी व संवैधानिक जिम्मेदारी है। ऐसे में कार्रवाई में देरी कई तरह के सवाल खड़े कर रही है और यह स्थिति आम लोगों में भ्रम की स्थिति भी पैदा कर रही है।



