PM Modi Bhutan Visit: थिम्फू। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय भूटान दौरे के दूसरे दिन बुधवार को भारत-भूटान संबंधों को नई ऊंचाई मिली। पीएम मोदी ने भूटान के चौथे ड्रुक ग्यालपो जिग्मे सिंग्ये वांगचुक से थिम्फू में मुलाकात कर ऊर्जा, व्यापार, तकनीक, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक बंधनों पर विस्तृत चर्चा की। दोनों नेताओं ने ग्लोबल पीस प्रेयर फेस्टिवल के हिस्से के रूप में ‘कालचक्र अभिषेक’ कार्यक्रम का संयुक्त उद्घाटन किया, जो भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों के प्रदर्शन के साथ हुआ। पीएम मोदी ने कहा कि यह आयोजन दोनों देशों के आध्यात्मिक जुड़ाव को मजबूत करता है।
भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए कार विस्फोट में मारे गए लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में भारत सरकार ने भूटान की एकजुटता की सराहना की। पीएम मोदी ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना और आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम के लिए पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, भारत भूटान के सतत विकास में सक्रिय साझेदार है।
मंगलवार को पीएम मोदी और भूटान नरेश ने 1020 मेगावाट की पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन किया, जो दोनों देशों की मित्रता का प्रतीक है। भूटान सरकार ने भारत को बिजली निर्यात की शुरुआत का स्वागत किया। बुधवार को 1200 मेगावाट की पुनात्सांगछू-I परियोजना के मुख्य बांध निर्माण को फिर शुरू करने पर सहमति बनी, जो भारत-भूटान की सबसे बड़ी संयुक्त परियोजना होगी। दोनों पक्षों ने सतत विकास, ऊर्जा सहयोग और सीमा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया। दौरे के दौरान रेल कनेक्टिविटी परियोजनाओं कोक्राझाड़-गेलेफू और बनारहाट-साम्त्से का भी जिक्र हुआ, जो भूटान को पहली रेल लाइन प्रदान करेंगी।
पीएम मोदी ने चौथे राजा के 70वें जन्मदिन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक बंधन को रेखांकित करता है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 1966 में स्थापित राजनयिक संबंध 2026 में 60 वर्ष पूरे करेंगे। 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 506 मिलियन डॉलर रहा, जिसमें हीरे, दवा और मशीनरी प्रमुख हैं। दौरे का समापन दिल्ली लौटने के साथ हुआ, जो ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का मजबूत संदेश देता है।



