जशपुर। अंधविश्वास और हैवानियत की हदें पार कर देने वाला मामला जशपुर जिले से सामने आया है। दुलदुला थाना क्षेत्र के ग्राम भिंजपुर में एक 53 वर्षीय महिला को टोनही बताकर उसके साथ जमकर मारपीट की गई। इस शर्मनाक घटना में रायपुर क्राइम ब्रांच में पदस्थ एएसआई फूलचंद राम भगत मुख्य आरोपी है। पुलिस ने घटना के 24 घंटे के भीतर एक पुलिस अधिकारी समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि दो बैगा और उनके साथी अब भी फरार हैं।
सुबह 4 बजे टूटा दरवाज़ा, मौत से जोड़ दिया टोना
पीड़िता फौसी बाई (53 वर्ष) ने बताया कि भोर करीब 4 बजे कुछ लोग उसके घर के बाहर पहुंचकर शोर मचाने लगे, गालियां दीं और जान से मारने की धमकी देने लगे। भयभीत फौसी बाई ने दरवाज़ा नहीं खोला, तो आरोपियों ने दरवाज़ा तोड़कर घर में घुसकर उस पर हमला कर दिया। आरोपियों ने उस पर आरोप लगाया कि उसने गायत्री भगत की मां सुनीता बाई को जादू-टोना कर मार दिया है और अब उसे “जिंदा करना होगा”।
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इसके बाद गायत्री भगत, फूलचंद भगत (ASI), विष्णु भगत, अनीता भगत, रमेश भगत, ललिता भगत, अंजना मिंज और तेलेस्फोर मिंज ने मिलकर महिला को बेरहमी से पीटा, बाल पकड़कर घसीटा और उसे श्मशान घाट की ओर ले जाने लगे। शोर सुनकर पीड़िता के बेटे और बेटी ने पहुंचकर किसी तरह उसे बचाया।
मृतका को “जिंदा” करने पहुँचा था एएसआई
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी फूलचंद राम भगत, जो रायपुर क्राइम ब्रांच में सहायक उपनिरीक्षक है, उसकी पत्नी सुनीता भगत की 30 अक्टूबर 2025 को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। सुनीता कुछ समय पहले खेती-किसानी के काम से अपने मायके भिंजपुर आई हुई थी। पत्नी की मौत के बाद फूलचंद भगत ने कुछ बैगाओं से संपर्क किया, जिन्होंने दावा किया कि वे मृतका को जिंदा कर सकते हैं। फूलचंद इन बैगाओं को लेकर भिंजपुर के श्मशान घाट पहुंचा, जहां तथाकथित “तंत्र-मंत्र” की क्रिया की गई। इसी दौरान बैगाओं ने फौसी बाई को “जादूगरनी” करार दिया — और यहीं से अंधविश्वास ने हिंसा का रूप ले लिया।
एसएसपी बोले — अंधविश्वास नहीं, यह अपराध है
मामले पर एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा किसी को टोनही बताकर प्रताड़ित करना अंधविश्वास ही नहीं, बल्कि गंभीर अपराध है। दुलदुला के भिंजपुर गांव में हुई इस घटना के सभी आठ आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस आम जनता से अपील करती है कि वे ऐसे अंधविश्वासी और कुप्रथाओं से दूर रहें।
इन धाराओं में केस दर्ज
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 (अंधविश्वास आधारित अपराध), 351(2), 115(2), 333, 190, 191(2) और टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2005 की धारा 4 और 5 के तहत मामला दर्ज किया है।
गांव में फैला दहशत का माहौल
घटना के बाद से भिंजपुर गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों में आक्रोश है कि एक पुलिसकर्मी ने ही अंधविश्वास फैलाकर हिंसा को अंजाम दिया। वहीं, पुलिस फरार बैगाओं की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।



