रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रेस वार्ता में प्रदेश की जांच एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ACB-EOW लोकतंत्र के ढांचे को हिला रही हैं और अदालत की कार्यवाही को प्रभावित कर रही हैं।
भूपेश बघेल ने कहा-
“जांच एजेंसियों ने पहले से ही फैसला लिख रखा है कि हमें दोषी ठहराना है। आप क्या खाक अदालत में सफाई देंगे, जब साक्ष्य ही झूठे गढ़े जा रहे हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि अब “कलमबंद बयान” (statement under section 164) से छेड़छाड़ की जा रही है।
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“कोयला घोटाले के आरोपियों के खिलाफ जो कलमबंद बयान पेश किया गया, वह न्यायाधीश के सामने खोला जाना था, लेकिन उसे सरकार के अधिकारियों ने पहले ही खोल लिया। उस बयान की प्रति में अलग-अलग फोंट पाए गए और दो दिन में 25 पन्नों के बयान दर्ज कर लिए गए,” — बघेल ने कहा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि जिस बयान की प्रति अदालत में सीलबंद लिफाफे में जानी थी, वह मीडिया हाउसों तक कैसे पहुँची?
“किसी भी मीडिया हाउस ने यह सवाल नहीं किया कि उनके पास वह दस्तावेज़ आया कैसे। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक स्थिति है।”
उन्होंने कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है, पहले भी इस तरह की घटनाएँ हो चुकी हैं, और शिकायत के बावजूद ऐसी कार्रवाइयाँ जारी हैं।
“इसका मतलब साफ है कि ACB-EOW को न तो कानून का डर है, न ही न्यायालय का। वे जो चाहें, कर सकते हैं,” — बघेल ने तीखा हमला बोला।



