पंकज विश्वकर्मा(समाचार संपादक)
रायपुर. राजधानी रायपुर की बेशकीमती जमीनों का फर्जीवाड़ा हजारों करोड़ रुपए का होता जा रहा है। भारत माला प्रोजेक्ट घोटाले के एक आरोपी विजय जैन का एक और काला कारनामा फिर सामने आया है। इस बार भी राजधानी के प्राचीन मठ-मंदिरों की बेशकीमती जमीन भी कौड़ियों के दाम पर कागजों में खरीदी गई और उन्हें करोड़ों में बेच दिया गया।

रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 न्यूज चैनल को प्राप्त दस्तावेजों से यह पता चलता है कि श्री रामचन्द्र स्वामी जैतूसाव मठ की धरमपुरा स्थित दर्जनों एकड़ भूमि की जबरदस्त बंदरबांट कर करोड़ों की हेराफेरी की गई है। धरमपुरा की इस भूमि को राजस्व के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से पहले बैक डेट में फर्जी तरीके से विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर दर्ज कराया गया फिर इसे करोड़ों रूपए में बेच दिया गया पंरतु इन भूमियों की रजिस्ट्री शासकीय दरों में की गई। मास्टरमाइंड विजय जैन ने इन जमीनों की खरीदी-बिक्री के लिए अपने पुत्र सौरभ जैन को भी शामिल कर लिया।

इनके फर्जीवाड़ा का सबसे बड़ा उदाहरण राजस्व विभाग के नोटिस से पता चलता है। 19 अक्टूबर 2023 के इस नोटिस में जो तात्कालिक तहसीलदार, रायपुर के द्वारा जारी है उसमें आवेदक पक्षकार सौरभ जैन पिता विजय जैन एवं अन्य है वहीं अनावेदक पक्षकार भी स्वयं सौरभ जैन पिता विजय जैन एवं अन्य है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न विधि विशेषज्ञों और राजस्व विभाग के पूर्ववर्ती अधिकारियों से जब इस मामले में राय दी तो उन्होंने एक मत से कहा कि पूरी कार्यवाही ग़लत है। विधि अनुसार ऐसा नहीं हो सकता है।

धरमपुरा की खसरा नंबर 284 मूलतः श्री रामचन्द्र स्वामी जैतूसाव मठ के नाम पर दर्ज भूमि थी। वर्तमान में इसके 50 से ज्यादा टुकड़े और भूस्वामी राजस्व अभिलेखों में दर्ज है।
इस मामले में विजय जैन से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि ये जमीन जैतूसाव मठ की नहीं गोपी दास मंदिर ट्रस्ट की है। हमारे पास सिर्फ खाते हैं जमीन नहीं है। हम सभी कोर्ट से केस जीत चुके हैं। दस्तावेजों को उपलब्ध कराने पर पहले गोलमोल जवाब दिया गया फिर धमकी-चमकी शुरू कर दी गई। तात्कालिक तहसीलदार अजय चंद्रवंशी से लगातार संपर्क किया गया तो उन्होंने काल रिसीव ही नहीं किया। इस मामले की और भी कई परतें है जिसे भी आपके सामने लाया जायेगा।



