पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य की सबसे शक्तिशाली जांच एजेंसी आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और एंटी करप्शन भारत माला प्रोजेक्ट के रायपुर-विशाखापत्तनम कारिडोर में हुई आर्थिक अनियमिता और भष्ट्राचार में अपराध पंजीबद्ध कर जांच कर रही है। इस जांच की घोषणा स्वयं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा में की थी। इससे इस पूरे मामले की गंभीरता और साय सरकार के सुशासन के लिए किये जा रहे प्रयासों को समझा जा सकता है।

पंरतु क्या वास्तव में जांच एजेंसी सही दिशा में कार्य कर रही है या भंयकर शक्तिशाली राजनेताओं की कठपुतली की तरह उनके इशारों पर नाच रही है? क्योंकि जिस मामले में अपराध पंजीबद्ध किया गया है उस मामले में तो जांच आगे की ही नहीं जा रही है बल्कि की गई गिरफ्तारी अलग कहानी बयान कर रही है।

पिछले दो अंकों में हमने जैतूसाव मठ और उससे जुड़ी जमीनों के विवाद को आपके सामने प्रस्तुत किया था। पूरा मामला ट्रस्ट से जुड़े भ्रष्ट राजनेताओं और भूमाफियाओं के कारनामों का है। जिस विश्वनाथ पांडेय ने कलेक्टर की अनुमति से उगेतरा की 25 एकड़ जमीन को ट्रस्ट से 1972 में खरीदा था और उनके वारिसान उमा तिवारी ने राजस्व के 4 न्यायालयों में जीत हासिल कर ली और वर्तमान में मालिकाना हक के लिए पूरा मामला सिविल न्यायालय में लंबित है। उस मामले में ईओडब्ल्यू ने उमा तिवारी, उनके पति केदार तिवारी के साथ कारोबारी हरमीत खनूजा और विजय जैन को गिरफ्तार किया है। उगेतरा गांव तो रायपुर-विशाखापत्तनम कारिडोर में है ही नहीं, वो तो आरंग-रायपुर-दुर्ग सिक्सलेन एक्सप्रेस वे में स्थित है। तो क्या वर्तमान में ईओडब्ल्यू ने जो 23/04/25 एफआईआर दर्ज की है वो रायपुर- विशाखापत्तनम कारिडोर में हुई आर्थिक अनियमिता और भष्ट्राचार की है या आरंग-रायपुर-दुर्ग सिक्सलेन एक्सप्रेस वे में एक गांव और एक महिला को मिलें मुआवजे की रकम पर है? इस पर आगे और खुलासे हम करेंगे।

अब आप को बताते हैं कई परतों में हुए रायपुर विशाखापत्तनम कारिडोर में हुए करोड़ों रूपए के आर्थिक अपराध में सिर्फ अभनपुर विकासखण्ड के छः गांवों में से नायकबांध में एक शासकीय भूमि पर करोड़ों रुपए के मुआवजे की बंदरबांट की। हम नायक बांधा और बाकी के पांच गांवों के निजी भूमि का खेल अगले अंकों मे आप तक पहुंचायेंगे।

वर्ष 1959-60 में तात्कालिक मघ्यप्रदेश शासन के जलसंसाधन विभाग द्वारा नायकबांधा में लगभग एक हेक्टेयर भूमि को जलाशय निर्माण के लिए अधिग्रहित किया था।जलसंसाधन विभाग द्वारा किसानों को मुआवजा देने और भूमि अधिग्रहण करने के बाद राजस्व विभाग से लगातार पत्राचार कर भूमि विभाग के नाम दुरूस्त करने को कहा। लेकिन 1960 से आज तक अधिग्रहित भूमि जलसंसाधन विभाग के नाम नहीं की गई। अंतिम पत्र 05/2016 को राजस्व विभाग को रिकार्ड दुरुस्ती के लिखा गया पंरतु राजस्व अमले ने कुछ नहीं किया।
जबकि इस कारिडोर की तैयारी 2014 से शुरू हो गई थी। इस जमीन और दस्तावेजों की जानकारी विभाग के अधिकारीयों को थी। जानबूझकर जलसंसाधन विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों दीपक देव, आमीन पटवारी, नरेंद्र नायक और जी.आर.वर्मा ने राजस्व विभाग के अधिकारीयों और कर्मचारियों के साथ मिलकर मिथ्या दस्तावेज तैयार कर करोड़ों का घपला किया। क्योंकि राजस्व विभाग के रिकार्डों में जलाशय के नाम पर रिकॉर्ड दुरूस्त नहीं थे। इस मामले में कमल नारायण चतुर्वेदानी, ललित चतुर्वेदानी, मुकेश चतुर्वेदानी, ललिता बघेल, मीना बाई, उषा चतुर्वेदानी, मेघराज चतुर्वेदानी और झरना चतुर्वेदानी को फ़र्जी दस्तावेजों के आधार पर 69.89 लाख का मुआवजा, टीकमचंद राठी, पुरुषोत्तम,दिनेश टावरी, नंदकिशोर टवारी, सावन टावरी,हेमंत टावरी और लीला देवी टावरी को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 1.04 करोड और पारस कुमार चोपड़ा को 59.97 लाख का मुआवजा देकर जानबूझकर सरकार को चूना लगाया गया। जब इस पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर रायपुर से की गई तो जांच अधिकारी और तात्कालिक अपर कलेक्टर बी.सी.साहू ने अपने 30/1/23 के जांच प्रतिवेदन में पूरे मामले को सही और 2.34 करोड़ की सरकार को आर्थिक हानि बताई है।
भारत माला प्रोजेक्ट घोटालों पर इनसाइड स्टोरी और एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट -4 (संपूर्ण दस्तावेज़ी साक्ष्यों, साक्षात्कार और ग्राउंड रिपोर्ट पर आधारित)



