फर्जी पत्रकार के वसूली गैंग का तीसरी आंख करेंगी खुलासा, राजधानी के व्यवसायी से गुडंई कर वसूले 4 लाख
रायपुर। क्या राजधानी में पत्रकारिता अब अपराधियों की ढाल बन गई है क्या रायपुर की सड़कों पर अब “मैं पत्रकार हूं” कहकर कोई भी व्यापारी को लूट सकता है, धमका सकता है, और पूरे परिवार को बर्बादी की कगार पर लाने कि धमकी दे सकता है और पूरा सिस्टम चुप बैठा देखता रहेगा? ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया ज़ब व्यापारी ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई, जिसे जानने के बाद आपके भी रोंगटे खड़े हो जायेंगे।

आपको बता दें कि टैगोर नगर के प्रतिष्ठित व्यवसायी विजय कुमार जैन की आपबीती सुनकर हमारे भी रोंगटे खड़े हो गए। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को जो शिकायत सौंपी है, वह न केवल भयावह है, बल्कि पूरे समाज और शासन-प्रशासन के लिए एक सीधा चैलेंज है।
तुझे ऐसा फंसाऊंगा कि तेरी जिंदगी जेल में सड़ जाएगी, और तेरा परिवार खुदकुशी करने पर मजबूर हो जाएगा

व्यवसायी के मुताबिक, खुद को पत्रकार बताने वाला एक व्यक्ति बार-बार उनके परिसर में घुसकर धमकाता रहा, खुद को पुलिस अधिकारियों का खास बताकर कहता रहा –

पुलिस मेरी जेब में है। जैसा चाहूं वैसा मुकदमा दर्ज करा सकता हूं। तेरे खिलाफ ऐसा वीडियो वायरल करूंगा कि तू समाज से बाहर हो जाएगा।
पहले दुकान में घुसकर लूटा, फिर सड़क पर रोककर दोबारा उगाही : पहले गल्ले से 2 लाख रुपये उठाए गए दिनदहाड़े। फिर टैगोर नगर चौक में बैंक ऑफ बड़ौदा के पास, एक व्यक्ति रास्ता रोकता है और कहता है – “मैं पत्रकार हूं, अखलेश सर ने भेजा है, रकम दो, वरना अंजाम भुगतना पड़ेगा।” डरा-सहमा व्यापारी फिर से 2 लाख रुपये सौंप देता है।

व्हाट्सऐप पर भेजे वीडियो : “मैं मर रहा हूं, मेरी मौत का जिम्मेदार तू होगा” : अब यह मामला रंगदारी और ब्लैकमेलिंग से कहीं आगे जा चुका है। व्यवसायी को लगातार अलग-अलग नंबरों से कॉल्स, व्हाट्सऐप मैसेज, और धमकी भरे वीडियो भेजे जा रहे हैं। एक वीडियो में साफ तौर पर कहा गया –

“मैं आत्महत्या कर रहा हूं, और इसके लिए तू जिम्मेदार होगा। तुझे ऐसा बदनाम करूंगा कि तेरे बच्चे स्कूल नहीं जा पाएंगे। समाज तेरे परिवार को थूककर बाहर कर देगा।

व्यवसायी ने दुकान जाना बंद किया, परिवार मानसिक त्रासदी में लगातार उत्पीड़न से परेशान होकर व्यवसायी ने दुकान जाना छोड़ दिया है। उनका परिवार दहशत और तनाव में जी रहा है। वे कहते हैं –

अब डर नहीं, लेकिन अगर आज नहीं लड़ा, तो कल कोई और ऐसे ही लूटा जाएगा।
पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल “क्या वाकई सब जेब में है?” : सबसे बड़ा सवाल यही है – जब यह कथित पत्रकार खुलेआम कहता है कि “पुलिस मेरी जेब में है,” तो क्या रायपुर की कानून व्यवस्था वाकई इतने नीचे गिर चुकी है? व्यवसायी ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की तत्काल जांच कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

दूसरे पक्ष ने कोई जवाब नहीं दिया : जब हमारे संवाददाता ने उक्त व्यक्ति से बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने मामले में टिप्पणी देने से स्पष्ट इनकार कर दिया।

पत्रकारिता या भयतंत्र? जनता को तय करना होगा : यह मामला सिर्फ पत्रकारिता के नाम पर अपराध नहीं है, बल्कि लोकतंत्र के खिलाफ एक सुनियोजित हमला है। अगर ऐसे लोगों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो “पत्रकार” की आड़ में अपराधियों को खुली छूट मिल जाएगी।
अब चुप रहना गुनाह है। यह लड़ाई सिर्फ विजय जैन की नहीं यह हर उस नागरिक की है, जो सच के साथ खड़ा है और भय के खिलाफ लड़ना चाहता है।



