पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
सभी फोटो हेमंत गोस्वामी
रायपुर/सारंगढ़ : प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल-बेहाल है। कई स्वास्थ्य केंद्रो में तो एम.बी.बी.एस. डॉक्टर तक की पदस्थापना तक नहीं है। इन केंद्रों में आर.एम.ए. और आर.एच.ओ. सहित ए.एन.एम.के भरोसे पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।

इस वजह से प्रदेश में झोलाछाप डॉक्टरों की बाढ़ आ गई है और आयें दिन इनकी कारस्तानी सामने आती हैं। पिछले ही दिनों रायपुर न्यूज नेटवर्क ने एक विशेष रिपोर्ट और सीरीज के माध्यम से बताया था कि इन झोलाछाप डॉक्टरों की वजह से क्या कुछ हो रहा है। दुर्ग में जहां एक झोलाछाप डॉक्टर के ग़लत इंजेक्शन लगाने से एक युवक की मौत हो गई थी वहीं तिल्दा में एक झोलाछाप के ग़लत इलाज की वजह से एक सात वर्षीय बालक का एक हाथ खराब हो गया है। इन मामलों में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर लिया।

सारंगढ़ जिले के बिलाईगढ ब्लाक के गोपालपुर गांव से स्वास्थ्य विभाग की हृदय विदारक लापारवाही और गलती
सामने आई है। यहां टीकाकरण के बाद एक पांच वर्षीय बच्ची की मौत हो गई है। जो पूरी तरह से अपराध की श्रेणी में आता है। गांव के साधारण किसान तुलसीराम साहू और शीतल का विवाह 2017 में हुआ था। विवाह के बाद बड़ी मन्नतों के बाद 12 अगस्त को उनके घर एक बच्ची का जन्म हुआ। जन्म के बाद सभी बच्चों का टीकाकरण होता है। सरकारें अक्सर टीकाकरण को एक अभियान के रूप में लेती है।

पूर्व में बच्ची को एक टीका लगा था। 3 जनवरी को दोपहर साढ़े बारह बजे गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में मनीष साहू, आर.एच.ओ. और शारदा साहू, ए.एन.एम. की मौजूदगी में 3 टीके लगाए गए। टीका लगाने के कुछ समय बाद बच्ची ने मां का दूध पीना बंद कर दिया। देर रात बच्ची की स्थिति सामान्य नहीं दिख रही थी। बच्ची नींद में होने के बाद भी कराह रही थी। दंपति के अनुसार सुबह 4 बजे उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से फोन में संपर्क किया पंरतु किसी ने भी फोन नहीं उठाया। सुबह साढ़े छः बजे वो बच्ची को लेकर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तब तक बच्ची की मौत हो चुकी थी। इस इलाके में और भी कोई एम.बी.बी.एस. प्रैक्टिसनर डॉक्टर भी नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र में भी एक माह पूर्व ही एक एम.बी.बी.एस. डाक्टर गिरीश की पदस्थापना की गई है।

जब शाम 4 बजे रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 की टीम ने स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया तो सिर्फ एक स्टाफ नर्स ही ड्यूटी में थी। जबकि यहां दो डिलीवरी केस के पेशेंट भर्ती थे। यहां पर 14 कर्मचारियों की पदस्थापना का बोर्ड भी लगा हुआ है पंरतु अन्य कोई भी उपस्थित नहीं था।

इस पूरे मामले की पड़ताल में जब उपस्थित नर्स से बच्ची की मौत पर पूछा गया तो उसने स्पष्ट रूप से बोला की वो छुट्टी में थी इसकी कोई जानकारी नहीं है।

नवपदस्थ डाक्टर गिरीश से फोन में संपर्क किया गया तो उन्होंने कई प्रयासों के बावजूद फोन नहीं उठाया। बी.एम.ओ. डाक्टर पुष्पेन्द्र वैष्णव ने भी फोन नहीं उठाया इसके पश्चात मोबाइल ही स्वीच ऑफ कर दिया।

आर.एम.ए जी चंद्रा जो केंद्र के प्रभारी के तौर पर भी कार्यरत हैं उन्होंने फोन में बताया कि ये घटनाक्रम सामने आया है। जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को बता दिया गया है। उनसे जिले के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी से संपर्क के लिए फोन नं मांगा गया तो उन्होंने नं देने से स्पष्ट मना कर दिया। उन्होंने बोला सी.एम.एच.ओ. डॉक्टर निराला का निर्देश है कि उनका नं किसी को नहीं दिया जाये। किसी भी जिले के सर्वोच्च स्वास्थ्य अधिकारी ऐसा निर्देश देता है तो आप समझ सकते हैं कि उस जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की क्या स्थिति है।
अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले के सामने आने के बाद कलेक्टर क्या कार्यवाही करते हैं ?



