पंकज विश्वकर्मा(समाचार संपादक)
रायपुर/कोरबा. छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल-बेहाल है। मिडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रसव पीड़ा बढ़ने के बाद प्रसूता के परिजनों ने महतारी एक्सप्रेस-102 एम्बुलेंस को काल किया, लेकिन वाहन समय पर नहीं पहुंच पाया। मजबूरन महिला को ई-रिक्शा से जिला मेडिकल कॉलेज ले जाया जा रहा था, इसी दौरान कोरबा के बुधवारी के पास उसने नवजात को जन्म दे दिया। ये छत्तीसगढ़ की विडम्बना है कि प्रसूता को सही समय में स्वास्थ्य सेवाएं प्रशासन उपलब्ध नहीं करा पाया। पूरा मामला दर्री थाना क्षेत्र के अयोध्यापुरी इलाके का है। जहां छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही का एक गंभीर नमूना सामने आया है। यहां चलती ई-रिक्शा में एक महिला ने नवजात को जन्म दिया है।
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मिडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रसूता की प्रसव पीड़ा बढ़ने के बाद उसके परिजनों ने महतारी एक्सप्रेस-102 एम्बुलेंस को काल किया था, पंरतु वाहन समय पर नहीं पहुंच पाया। मजबूरन महिला को ई-रिक्शा से कोरबा के जिला मेडिकल कॉलेज ले जाया जा रहा था, इसी दौरान बुधवारी के पास उसने नवजात को जन्म दे दिया। बताया जा रहा है कि अयोध्यापुरी निवासी महिला को सुबह लेबर पेन बढ़ने पर नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां जांच के दौरान स्टाफ ने उसकी हालत गंभीर बताते हुए जिला मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
उन्हें बताया गया कि महिला में खून की कमी है, जिसके चलते प्रसव में जटिलता हो सकती है। एम्बुलेंस के लिए कॉल किया गया, पर देर तक वाहन नहीं पहुंच पाया। इसके बाद परिजनों और स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने एक ई-रिक्शा चालक को बुलाया। परिजन महिला को ई-रिक्शा में जिला मेडिकल कालेज ले जा रहे थे तभी रास्ते में बुधवारी में उसने शिशु को जन्म दे दिया। महिला का पति जो पेशे से राज मिस्त्री हैं, उसने स्वास्थ्य कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाये है कि उनकी पत्नी की हालत बिगड़ती देख मितानिन वहां से अपने घर चली गई। काल करने और बुलाने के बाद भी मितानिन जिला अस्पताल तक साथ नहीं गई।
समुचित वाहन की व्यवस्था नहीं कर पाना प्रशासनिक अव्यवस्था का एक दिल दहला देने वाला मामला है। जिसके चलते महिला ने चलती ई-रिक्शा में बच्चे को जन्म दिया और ये घटना मानवता के लिए शर्मसार घटना है।



