रायपुर। बीजापुर जिला अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही सामने आई है, जहां मोतियाबिंद के ऑपरेशन के दौरान संक्रमण नियंत्रण में भयानक चूक हुई। इसके चलते 9 मरीजों की हालत बिगड़ गई और उन्हें तुरंत रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से 8 मरीजों की आंखों में गंभीर इंफेक्शन पाया गया है, जिसमें कुछ की आंखों में भयानक सूजन है तो कुछ में पस भर गया है।
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मेकाहारा अधीक्षक डॉक्टर संतोष सोनकर ने खुलासा किया कि बीजापुर अस्पताल में हुए ऑपरेशन के बाद मरीजों की यह दयनीय स्थिति स्वास्थ्य विभाग की असफलता का जीता-जागता सबूत है। संक्रमण को कम करने के लिए एंटीबायोटिक्स और अन्य दवाएं दी जा रही हैं, लेकिन मरीजों को फिर से ऑपरेशन की जरूरत पड़ेगी। यह स्पष्ट है कि स्टरलाइजेशन और हाइजीन प्रोटोकॉल की अनदेखी ने मरीजों की जिंदगी दांव पर लगा दी।
यह कोई नई घटना नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की नाकामी का सिलसिला जारी है। महज एक साल पहले दंतेवाड़ा में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद 13 मरीजों की आंखों में इंफेक्शन फैल गया था, जिससे कई लोगों की रोशनी हमेशा के लिए छिन गई। तब भी मरीजों को रायपुर लाकर इलाज करना पड़ा था। सरकार ने जांच के नाम पर खानापूर्ति की और एक डॉक्टर सहित तीन लोगों को सस्पेंड कर दिखावा किया, लेकिन कोई स्थायी सुधार नहीं हुआ। बस्तर क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली बार-बार उजागर हो रही है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे स्वास्थ्य विभाग पर है। विभाग की उदासीनता और संसाधनों की कमी ने मरीजों को अंधेरे में धकेल दिया है।



