बस्तर। वन अधिकार पत्र योजना की आड़ में बकावंड विकासखंड में वन विभाग के कार्यालय परिसर की जमीन को अवैध रूप से बेचे जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण में विभागीय अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की मिलीभगत का आरोप लग रहा है। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों से पैसों का लेनदेन कर वन विभाग कार्यालय परिसर की भूमि पर फर्जी तरीके से वन अधिकार पट्टे जारी कराए जा रहे हैं।
यह मामला ग्राम पंचायत राजनगर का है, जहां वन विभाग के स्थानीय अधिकारियों के संरक्षण में वन भूमि का विक्रय किया जा रहा है। बकावंड वन परिक्षेत्र के वन विभाग परिसर की भूमि को ग्रामीणों के नाम पर टुकड़ों में बांटकर पट्टा बनवाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, ग्राम पंचायत प्रतिनिधि और वन अधिकारी मिलकर इस धांधली को अंजाम दे रहे हैं, जबकि उच्च अधिकारी इस पर मौन हैं।
जानकारी के मुताबिक, राजनगर पंचायत की ब्लॉक कॉलोनी में स्थित वन विभाग कार्यालय परिसर के खसरा नंबर 2386/1 और 2386/2 की भूमि को विभाजित कर वन अधिकार पट्टे जारी किए गए हैं। मूल नक्शे में यह भूमि खसरा नंबर 2386 के रूप में दर्ज है, जिसे दो हिस्सों में बांटने का अधिकार किसे मिला, यह जांच का विषय बना हुआ है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह पूरा खेल वन अधिकार अधिनियम के नियमों का खुला उल्लंघन है। कानून के अनुसार, केवल वे व्यक्ति ही पट्टे के पात्र हैं जो 13 दिसंबर 2005 के पहले से वन भूमि पर तीन पीढ़ियों यानी 75 वर्ष से निवासरत और जीविका के लिए उस पर निर्भर हैं।
वहीं, राजनगर क्षेत्र में वन विभाग की भूमि पर इस शर्त का पालन किए बिना फर्जी तरीके से पट्टे जारी किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस पर रोक नहीं लगी, तो भविष्य में शासकीय भवनों और सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए भूमि का संकट उत्पन्न हो जाएगा।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।



