Chhath Puja Day 2: छठ पूजा का पावन महापर्व 25 अक्टूबर से नहाय-खाय के साथ आरंभ हो चुका है। आज दूसरा दिन है, जिसे खरना कहा जाता है। छठ व्रत में खरना का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यही दिन अगले दो दिनों के निर्जला उपवास की शुरुआत का आधार होता है।
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‘खरना’ शब्द का अर्थ है — शुद्धता। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जल व्रत रखते हैं और शाम को छठी मैया को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। माना जाता है कि इस दिन की पवित्रता से ही पूजा में सिद्धि मिलती है।
खरना की विशेषताएं
इस दिन मिट्टी के नए चूल्हे पर आम की लकड़ियों से प्रसाद बनाया जाता है। इससे प्रसाद की पवित्रता बनी रहती है। पूरे दिन उपवास रखने के बाद शाम को देवी-देवताओं और छठी मैया को भोग अर्पित किया जाता है। इसके बाद व्रती प्रसाद ग्रहण करते हैं और अगले दिन के सूर्योदय अर्घ्य की तैयारी शुरू होती है।
खरना के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां
- पूजा से जुड़ी वस्तुओं को गंदे हाथों से न छुएं। हमेशा हाथ धोकर या स्नान के बाद ही छुएं।
- प्रसाद बनाने की जगह और बर्तन पूरी तरह साफ-सुथरे हों।
- प्रसाद या पूजन सामग्री में सेंधा नमक के अलावा कोई और नमक न मिलाएं।
- सूर्य देव और छठी मैया को प्रसाद अर्पित करने से पहले कोई भी व्यक्ति भोजन न करे।
- गंदे या अस्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा न करें।
खरना पूजन विधि
खरना के दिन सुबह घर की सफाई कर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को पुनः स्नान कर नए वस्त्र पहनें। मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ियों से खीर-रोटी का प्रसाद तैयार करें।
पहले छठी मैया को भोग लगाएं, दीप प्रज्वलित करें और विधिवत पूजा करें। पूजा के पश्चात व्रती और परिवारजन प्रसाद ग्रहण करें और माता का ध्यान करें।



