रायपुर। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। सोशल मीडिया पर शिकायतकर्ता महिला का एक ऑडियो क्लिप वायरल हुआ है, जिसमें वह यह कहते हुए सुनी जा रही है कि “किसी प्रकार का यौन उत्पीड़न नहीं हुआ।
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इस बीच, शिकायतकर्ता की बहन और जीजा ने भी मीडिया के सामने आकर आरोपों को झूठा करार दिया है। दोनों ने कहा कि पहले भी उनके परिवार को झूठे मामलों में फंसाया गया था। उन्होंने बताया, “हमारे पिता पर भी पहले 376 का झूठा आरोप लगाया गया था, और हमें भी एट्रोसिटी एक्ट के तहत फंसाया गया था।”
दूसरी ओर, आईपीएस रतनलाल डांगी ने इन आरोपों को “एक सुनियोजित साजिश” बताया है। उन्होंने कहा कि उनकी साफ-सुथरी छवि और संभावित उच्च पदस्थ नियुक्तियों को निशाना बनाने के लिए यह षड्यंत्र रचा गया है।
जानकारी के मुताबिक, एक सब इंस्पेक्टर की पत्नी ने 2003 बैच के अधिकारी रतनलाल डांगी पर लगातार सात वर्षों से उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कई डिजिटल साक्ष्यों सहित शिकायत दर्ज कराई थी। विभाग ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
शिकायत में महिला ने कहा था कि साल 2017 में कोरबा एसपी के रूप में तैनाती के दौरान उनकी डांगी से जान-पहचान हुई थी। पहले सोशल मीडिया के माध्यम से बातचीत शुरू हुई, जो आगे वीडियो कॉल और मुलाकातों तक बढ़ी। महिला का आरोप है कि दंतेवाड़ा और राजनांदगांव में पदस्थापना के बाद भी संपर्क जारी रहा, लेकिन सरगुजा और बिलासपुर में आईजी बनने के बाद डांगी ने उसे परेशान करना शुरू कर दिया।
वहीं, रतनलाल डांगी ने डीजीपी अरुण देव गौतम को एक विस्तृत 14 बिंदुओं का जवाब पहले ही भेज दिया था, जिसमें उन्होंने शिकायतकर्ता और अन्य अज्ञात व्यक्तियों पर ब्लैकमेलिंग, मानसिक प्रताड़ना और आपराधिक धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
विभाग ने इस मामले की जांच के लिए 2001 बैच के आईपीएस डॉ. आनंद छाबड़ा और आईपीएस मिलना कुर्रे को जिम्मेदारी सौंपी है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मामले पर कहा कि “चाहे कोई भी अधिकारी हो, अगर आरोप लगाए गए हैं तो जांच अवश्य होगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।



