लोकेश्वर सिन्हा, गरियाबंद कि रिपोर्ट
गरियाबंद जिले के जंगलों में चल रहा सागौन तस्करी का गोरखधंधा एक बार फिर उजागर हुआ है। इस बार तस्करों ने “पुष्पा मूवी” के तर्ज पर इतना चालाक तरीका अपनाया है कि वन विभाग की आंखों में धूल झोंक कर वे कीमती सागौन लकड़ियों को राज्य की सीमाओं के पार तक पहुंचा रहे थे।
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मामला उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व अभ्यरण के घने जंगलों का है, जहां सागौन के हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर तस्कर लकड़ी को नदी के बहाव के सहारे ओड़िशा भेज रहे थे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा खेल बेहद योजनाबद्ध तरीके से चल रहा था। लकड़ी काटने के बाद उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में नदी किनारे रखा जाता, फिर रात के अंधेरे में उसे उदंती नदी के तेज बहाव में बहा दिया जाता था। नदी का प्रवाह सीधे छत्तीसगढ़–ओड़िशा सीमा की ओर जाता है, जहां पहले से तैनात तस्कर लकड़ी को निकाल कर ट्रैक्टर और मिनी ट्रक में लादते और आगे भेज देते।
वन विभाग को इस पूरे रैकेट की भनक तब लगी जब ग्रामीणों ने कुछ संदिग्ध लोगों को जंगल और नदी किनारे घूमते देखा। वन विभाग की टीम ने जब मौके पर जांच की तो नदी के किनारे से सागौन लकड़ी के भारी टुकड़े, आरा-काटने के निशान देखे गये।
यह तस्करी लंबे समय से चल रही थी, लेकिन इस बार सबूत मिलने के बाद कार्रवाई की शुरुआत कर दी गई है।
वही सूत्रों का कहना है कि इस नेटवर्क में स्थानीय लोगों की मिलीभगत से लेकर बाहर के बड़े तस्कर गिरोह और विभाग के कुछ लोग तक शामिल हैं।
वन मंडलाधिकारी ने बताया कि तस्करों की पहचान की जा रही है और कुछ पहचान हो गई है और अंतरराज्यीय गिरोह को पकड़ने के लिए ओड़िशा के वन विभाग से भी संपर्क किया गया है। ड्रोन सर्वे और गश्त बढ़ाने के साथ-साथ नदी मार्गों की विशेष निगरानी शुरू की गई है।
वही स्थानीय लोगों ने भी बताया कि कई बार रात के समय जंगल की ओर से आरा मशीनों की आवाजें सुनाई देती थीं, लेकिन डर के कारण वे शिकायत नहीं कर पाए। अब जब मामला खुल चुका है, तो ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि उदंती नदी पर स्थायी चौकी स्थापित की जाए, ताकि इस तरह की अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।
बताया जा रहा है कि एक घनफुट सागौन लकड़ी की कीमत बाजार में तीन से चार हजार रुपये तक होती है। ऐसे में हजारों घनफुट लकड़ी की तस्करी से लाखों रुपये का अवैध कारोबार फलफुल रहा था। वन विभाग ने अभी तक कई लकड़ियों को जब्त कर जांच शुरू कर दी है। वहीं इस पूरे मामले ने विभागीय तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं….
आखिर इतनी बड़ी तस्करी लंबे समय से चल रही थी तो इसकी भनक विभाग को पहले क्यों नहीं लगी? अब देखना होगा कि क्या वन विभाग इस “पुष्पा स्टाइल तस्करी गैंग” को पकड़ पाता है या नहीं, क्योंकि इस खुलासे ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है।



