बीजापुर। माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। ओडिशा में सक्रिय चार माओवादी कैडरों समेत पश्चिम बस्तर डिवीजन के संगठन छोड़कर फरार चल रहे दो कैडरों ने बीजापुर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। छह कैडरों पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें चार PPCM और दो PM रैंक के सदस्य बताए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों की पहचान रानी सोढ़ी उर्फ संध्या, पांडो पोड़ियम उर्फ सस्मिता, सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष, कोसा माड़वी उर्फ सतीश, देवे मड़कम उर्फ जन्नी और लालू ताती के रूप में हुई है। रानी, पांडो, सुक्कू और कोसा पर 8-8 लाख रुपये, देवे मड़कम पर 2 लाख और लालू ताती पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

कई घटनाओं में शामिल होने का पुलिस का दावा
पुलिस के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों में कुछ लंबे समय से माओवादी संगठन में सक्रिय थे। रानी सोढ़ी वर्ष 2012 से संगठन से जुड़ी थी और ओडिशा की कंपनी नंबर-8 में PPCM के पद पर काम कर रही थी। सुक्कू कुड़ियम वर्ष 2005 से संगठन में सक्रिय था और माओवादी नेतृत्व की सुरक्षा में तैनात रहा।
वहीं, कोसा माड़वी वर्ष 2005 से संगठन में सक्रिय था और कंपनी नंबर-02 में PPCM व ए-सेक्शन कमांडर की जिम्मेदारी संभाल रहा था। पुलिस ने उसे NMDC के CISF कैंप, चेरली और तेकुलगुड़ा समेत सुरक्षा बलों पर हमलों से जुड़ी घटनाओं में शामिल बताया है। अन्य कैडरों की भी ओडिशा और बस्तर क्षेत्र में हुई माओवादी गतिविधियों में भूमिका का पुलिस ने उल्लेख किया है।
पुनर्वास नीति से मुख्यधारा में लौटने का दावा
पुलिस का कहना है कि सुरक्षा बलों के लगातार अभियान, संगठन से मोहभंग, पूर्व माओवादियों के पुनर्वास और क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों से प्रभावित होकर कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला किया। पश्चिम बस्तर डिवीजन के दो कैडर संगठन छोड़ने के बाद फरार चल रहे थे, जिन्होंने सुरक्षा बलों के संपर्क में आने के बाद आत्मसमर्पण किया।
आत्मसमर्पण की कार्रवाई में DRG बीजापुर, CRPF की 170वीं बटालियन और बीजापुर पुलिस की भूमिका रही। पुलिस के अनुसार, शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत सभी छह कैडरों को नियमानुसार आर्थिक सहायता के साथ कौशल विकास, आवास, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी सुविधाओं का लाभ दिया जाएगा।




