पंकज विश्वकर्मा,
समाचार संपादक
रायपुर/बस्तर.NMDC-एन.एम.डी.सी लिमिटेड भारत की सबसे बड़ी आयरन ओर उत्पादक कंपनी है और यह स्टील मंत्रालय के तहत ₹ 68,075 करोड़ मूल्य की एक नवरत्न पब्लिक सेक्टर कंपनी है।

एन.एम.डी.सी. भारत सरकार के मालिकाना हक वाली कुल ₹36,929 करोड़ के संपत्ति और सालाना ₹15,721 करोड़ सकल आय प्राप्त करने वाली देश की सबसे बड़ी लोह अयस्क खनन और प्रोसेसिंग करने वाली कंपनी है। एन.एम.डी.सी. छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में तीन खदानों से 45 मिलियन टन सालाना से अधिक लौह अयस्क का उत्पादन करती है।
एन.एम.डी.सी. ने हाल ही में छत्तीसगढ़ के बस्तर में अपने नगरनार प्लांट में 2 मिलियन टन सालाना क्षमता वाले पेलेट प्लांट का शुभारंभ किया है। यह प्लांट छत्तीसगढ़ के बस्तर में कंपनी की ₹5,427 करोड़ के एक इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट और विस्तार योजनाओं का हिस्सा है।

₹5,427 करोड़ रुपये के इस इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट और विस्तार परियोजनाओं में आयरन ओर प्रोसेसिंग, पाइपलाइन और पेलेट बनाने की सुविधाएं शामिल हैं। इस विस्तार परियोजना में बचेली में एक नया आयरन ओर प्रोसेसिंग प्लांट, 15 मिट्रिक टन सालाना क्षमता वाली 135 किलोमीटर लंबी स्लरी पाइपलाइन और नगरनार में 2 मिट्रिक टन सालाना क्षमता वाला पेलेट प्लांट शामिल है।

एन.एम.डी.सी. का नगरनार में अपने 2 मिलियन टन सालाना क्षमता वाले प्रोजेक्ट और प्लांट स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य बैलाडिला खदानों से आयरन ओर फाइन्स का बेहतर उपयोग करना है साथ ही यह प्लांट 135 किमी लंबी स्लरी पाइपलाइन से जुड़ा है, जिससे परिवहन में सुविधा होगी। 135 किलोमीटर लंबी स्लरी पाइपलाइन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य बचेली में कंपनी के आयरन ओर ऑपरेशन्स को नगरनार में उसके स्टील प्लांट से जोड़ना है। यह पाइप लाइन बचेली से नगरनार तक प्रोसेस्ड आयरन ओर कॉन्संट्रेट ले जाती है, जिससे सड़क मार्ग से आयरन ओर ले जाने का एक विकल्प मिलता है और रेल एवं सड़क मार्ग के माल ढुलाई भाड़ा, प्रदूषण नियंत्रण और सड़कों के रख-रखाव सहित मरम्मत पर नियंत्रण भी हो जाता है।

यह 135 किलोमीटर लंबी स्लरी पाइपलाइन बस्तर और दंतेवाड़ा जिलों के 61 गांवों से होकर गुजरती है। इसे सड़क मार्ग से संसाधित लोह अयस्क के परिवहन को कम करने, परिवहन का वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराने, रेलवे पर निर्भरता घटाने और कंपनी के बचेली ऑपरेशन्स और नगरनार के बीच एक डेडिकेटेड लिंक सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है।
इन सुविधाओं से एन.एम.डी.सी. अपनी बैलाडिला खदानों से निकलने वाले आयरन ओर फाइन्स और स्लाइम्स को कॉन्संट्रेट में प्रोसेस कर सकेगा और बाद में उस कॉन्संट्रेट को पेलेट में बदल सकेगा। यह नव स्थापित पेलेट प्लांट स्टील बनाने में इस्तेमाल होने वाले पेलेट के प्रोडक्शन के लिए ‘स्ट्रेट ग्रेट इंडुरेशन टेक्नोलॉजी’ का इस्तेमाल करता है।

इस प्लांट के शुरू होने से आयरन ओर वैल्यू चेन में एन.एम.डी.सी. की मौजूदगी और मजबूत हुई है, इसमें माइनिंग और बेनिफिशिएशन से लेकर स्लरी ट्रांसपोर्टेशन और पेलेट प्रोडक्शन तक सब शामिल है। इससे कंपनी के पोर्टफोलियो में एक नया वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट भी जुड़ता है और कंपनी अपनी बैलाडिला खदानों से निकलने वाले आयरन ओर फाइन्स और स्लाइम्स का ज़्यादा बेहतर इस्तेमाल कर पायेंगी।

यह प्रोजेक्ट कंपनी की बड़ी विस्तार और डाइवर्सिफिकेशन रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि कंपनी लंबे समय से अपनी लौह अयस्क उत्पादन क्षमता को 100 मिलियन टन सालाना तक बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।




