रायपुर। डिजिटल दौर में बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के बीच छत्तीसगढ़ पुलिस का “साइबर जागृति अभियान” लगातार लोगों को जागरूक कर रहा है। इसी कड़ी में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में गुरुवार को विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में करीब 800 छात्र-छात्राओं, प्रोफेसरों और विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के सभागार में किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम शामिल हुए। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध के बदलते तरीकों और ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए जरूरी सावधानियों की जानकारी दी।
फर्जी कॉल से डिजिटल अरेस्ट तक, ठगी के नए तरीकों की जानकारी
कार्यक्रम में बताया गया कि साइबर अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। फर्जी कॉल और लिंक, ओटीपी के नाम पर धोखाधड़ी, बैंक और यूपीआई फ्रॉड, फर्जी कस्टमर केयर, सोशल मीडिया के जरिए ठगी, फर्जी निवेश योजनाएं, नौकरी और लोन के नाम पर धोखाधड़ी जैसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट और सेक्सटॉर्शन जैसे साइबर अपराधों को लेकर भी विद्यार्थियों को सतर्क किया गया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि अपराधी डर, लालच और दबाव का इस्तेमाल कर लोगों से उनकी गोपनीय जानकारी हासिल करते हैं और इसके बाद बैंक खाते से रकम निकाल लेते हैं।
OTP और UPI PIN किसी से शेयर न करें
पुलिस ने विद्यार्थियों को विशेष रूप से आगाह किया कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम या डेबिट कार्ड की जानकारी, बैंक डिटेल और पासवर्ड साझा न करें। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने या संदिग्ध मोबाइल एप डाउनलोड करने से भी बचने की सलाह दी गई।
अधिकारियों ने कहा कि बैंक या किसी सरकारी संस्था के नाम पर आने वाले संदिग्ध फोन पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करते समय भी सावधानी बरतनी जरूरी है।
ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर करें शिकायत
कार्यक्रम में साइबर ठगी का शिकार होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने पर जोर दिया गया। पुलिस ने बताया कि ऑनलाइन फ्रॉड होने पर घबराने के बजाय तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। साथ ही संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को भी तत्काल इसकी जानकारी देनी चाहिए।
पुलिस के मुताबिक, ठगी के बाद जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराई जाती है, रकम को रोकने या उसे वापस हासिल करने की संभावना उतनी ही अधिक रहती है।
युवाओं से परिवार और आसपास के लोगों को जागरूक करने की अपील
कार्यक्रम में विद्यार्थियों से कहा गया कि वे केवल खुद ही साइबर अपराधों से सावधान न रहें, बल्कि अपने परिवार, दोस्तों और आसपास के लोगों को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।
इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट आज रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ करना जरूरी है।
छत्तीसगढ़ पुलिस का “साइबर जागृति अभियान” 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक प्रदेशभर में चलाया जा रहा है। अभियान के तहत शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को साइबर अपराधों से बचाव के तरीके बताए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति गिरीश चंदेल, डीसीपी सेंट्रल जोन तारकेश्वर पटेल, एडिशनल डीसीपी क्राइम एवं साइबर गौरव मंडल सहित पुलिस और विश्वविद्यालय के अधिकारी मौजूद रहे।




