पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक )
रायपुर/छत्तीसगढ़. जब जहाज़ का कप्तान ही जहाज़ को डूबाने की तैयारी कर लें तो नाविकों और यात्रियों की रक्षा भगवान भरोसे रह जातीं हैं ? यही हाल राज्य सहकारी बैंक, अपेक्स का हो गया है।
सलाहकार के नाम पर सेटिंग?अपेक्स में नियमों की खुली धज्जियां।
अंकठ भष्ट्राचार में संलिप्त और उसको संरक्षण देते हुए अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक और विभागीय मंत्री के ओ.एस.डी कांडे रिटायरमेंट की दहलीज पर खड़े हैं। बमुश्किल चार माह शेष बचे हुए हैं।
अब उन्हें “मोटा माल” जो रिटायरमेंट के बाद कैसे आये इसकी चिंता ज्यादा सताने लगी है। वैसे छत्तीसगढ़ की बागडोर “विष्णु” के हाथ में है और इन त्रिदेवों में से दो दिल्ली में विराजमान हैं और एक अपने पास “सहकारिता” रखें हुए हैं।
भ्रष्ट कैडर अधिकारी श्रीवास्तव को चलित बैठक में बना दिया सलाहकार, बोर्ड मीटिंग में नहीं लिया अप्रूवल.
पूर्व कैडर आफिसर ए.के.श्रीवास्तव जो की रिटायरमेंट तक आई.टी और कृषि ऋण के हेड थे उनके कार्यकाल में अपेक्स में सबसे ज्यादा गबन-घोटालो-फर्जीवाडो को अंजाम दिया गया। बरमकेला कांड जो की विभागीय जांच में 18 करोड़ का घोषित और अघोषित तौर पर 50 करोड़ रुपए से ज्यादा का घोटाला है वो कम्प्यूटरों में ही किया गया था। जिसमें किसानों के खातों में भारी सेंधमारी कर उन्हें ऋणी बना दिया गया।

अवकाश पर चल रहीं लेखाधिकारी की आई.डी. और पासवर्ड दर्ज कर करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा कर दिया गया। तो क्या आई.टी. हेड श्रीवास्तव को इसकी जानकारी ही नहीं थी की अवकाश में चल रहे अधिकारी-कर्मचारी जो शाखा में उपस्थित नहीं है उसकी आई.डी. पासवर्ड का उपयोग कौन कर रहा है ? संभव ही नहीं है।
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वैसे भी बतौर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला सहकारी बैंक रायपुर में 500 करोड़ के हवाला कांड में कैडर आफिसर श्रीवास्तव ही मास्टर माइंड रहें हैं। शायद कुछ दिनों में राज्य की सबसे शक्तिशाली जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू/एसीबी अपराध पंजीबद्ध कर दें ? पंरतु अपेक्स बैंक मुख्यालय और प्रबंध संचालक सहयोग नहीं कर रहे हैं। कारण सभी को पता है ?
भ्रष्ट अधिकारी जोशी की भी सलाहकार बना कर वापसी की तैयारी.
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक दुर्ग के तात्कालिक मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुरेन्द्र कुमार जोशी को पार्टी विशेष के पक्ष में काम करने की शिकायत और बेमेतरा, बालोद सहित दुर्ग जिले के सेवा सहकारी समितियों से अपने नोडल अधिकारी के माध्यम से प्रति समिति 20 से 25 हजार की अवैध वसूली की शिकायत पर निलंबित कर दिया गया था। तीनों जिलों में 500 से ज्यादा समितियों से 80 लाख की अवैध वसूली की बात सामने आई थी।

अपेक्स के बतौर प्रबंध संचालक कांडे ने ही तात्कालिक कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी, दुर्ग के जांच प्रतिवेदन के आधार पर तात्कालिक मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुरेन्द्र कुमार जोशी को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 5 के उल्लंघन पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया था। वर्तमान में सेवानिवृत्ति जोशी की विभागीय जांच पूरी नहीं हुई है और रिटायरमेंट के पश्चात देय सभी भुगतान रोक दिये गये है। अब इस भ्रष्ट अधिकारी को भी बैंक में सलाहकार पद पर नियुक्ति की तैयारी चल रही हैं।
पूर्व में अपेक्स ने नियुक्त किया था आई.टी. सलाहकार, प्रति माह का भुगतान छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव से भी था ज्यादा.
अपेक्स प्रबंधन ने 2021 में एक आई.टी. सलाहकार की नियुक्ति की थी। जिसका मासिक भुगतान 3 लाख से ज्यादा तनख्वाह और अन्य भत्तों के रूप में था, जो की राज्य के मुख्य सचिव की तनख्वाह और अन्य भत्ते से भी ज्यादा थी। उस नियुक्त आई.टी. सलाहकार के कार्यकाल में ही करोड़ों के गबन-घोटालो-फर्जीवाडो को अंजाम दिया गया। मतलब बैंक को दोतरफा आर्थिक नुक़सान हुआ। और इसका जिम्मेदार बैंक का उच्चतर प्रबंधन ही था। इस वाक्ए से सबक ना लेते हुए सेवानिवृत्ति भ्रष्ट अधिकारीयों को सलाहकार क्यों बनाया जा रहा है ? यदि बैंक को बैंकिंग के बड़े एक्सपर्ट की ही आवश्यकता है तो राष्ट्रीय स्तर पर खोज की जाती और राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों में विज्ञापन दिया जाता ? कारण साफ़ है भ्रष्ट अधिकारी कांडे अपने रिटायरमेंट के बाद बैंक में वापसी की तैयारी कर रहे हैं।
बैंक के चेयरमैन केदार गुप्ता को उच्चतर प्रबंधन ने रखा अंधेरे में ?
पिछले वर्ष अप्रेल-मई में नियुक्त किए गए प्राधिकृत अधिकारी और चैयरमैन केदार गुप्ता जो की भाजपा में राजधानी के तेज़-तर्रार नेता माने जाते हैं और राज्य स्तर के प्रवक्ता रह चुके हैं। राजधानी की चारों विधानसभा सीटों में से किसी एक सीट पर आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी उन्हें चुनाव मैदान में अवश्य उतारेगी। और उनका राजनैतिक भविष्य उज्ज्वल है। पिछले दिनों उन्होंने पत्रकार वार्ता ले कर अपेक्स में किये गये 600 करोड़ से ज्यादा के गबन घोटाले और फर्जीवाड़ों की जांच को ईओडब्ल्यू और एसीबी से कराने की घोषणा की थी। अपने मार्गदर्शन में उन्होंने इस की प्रक्रिया को प्रारंभ भी कर दिया है। इन परिस्थितियों में इन नियुक्तियों की जानकारी शायद उन्हें दी ही नहीं गई है क्योंकि वो इसका खुलकर विरोध करते ?
यक्ष प्रश्न
1.बैंक की रायगढ़-सरगुजा क्षेत्रों में पदस्थ रहे 100 करोड़ के गबन-घोटालो-फर्जीवाडो को अंजाम देने वाले अधिकारी-कर्मचारी संजय साहू, हेमंत चन्द्राकार और हेमंत चौहान पर एफआईआर कब दर्ज होगी ?
2.आडिट/अंकेक्षण के नाम पर एक व्यक्ति द्वारा वर्षों से की जा रही वित्तीय अनियमिताओं को कब और कैसे रोका जायेगा?
3.सैकडों करोड़ों की राशि जो गबन-घोटालो-फर्जीवाडो में हड़प ली गई है उसकी रिकवरी कैसे की जायेगी ?



