बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में निजी स्कूलों द्वारा कथित अनियमितताओं का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने विद्यार्थियों को Central Board of Secondary Education (CBSE) पाठ्यक्रम से पढ़ाई कराई, जबकि परीक्षा Chhattisgarh Board of Secondary Education (CGBSE) के अंतर्गत दिलाई गई।
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इस मुद्दे को लेकर अभिभावकों ने विरोध जताते हुए जनहित याचिका दायर की है। उनका कहना है कि स्कूलों ने CBSE के नाम पर अधिक शुल्क वसूला, लेकिन बोर्ड मान्यता छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की रही, जिससे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है।
मामला संसद तक पहुंच गया है। कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद Jyotsna Charandas Mahant ने लोकसभा में इस विषय को उठाते हुए इसे “संगठित बोर्ड घोटाला” बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से किया गया फर्जीवाड़ा है।
जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा कक्षा 5वीं और 8वीं की केंद्रीकृत परीक्षा के निर्देश जारी होने के बाद यह अनियमितता उजागर हुई। कई निजी स्कूल छत्तीसगढ़ बोर्ड की मान्यता लेकर CBSE पैटर्न से पढ़ाई करा रहे थे और उसी आधार पर फीस भी वसूल रहे थे।
सांसद महंत ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने तथा दोषी स्कूलों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।



