पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक )
रायपुर/छत्तीसगढ़. राज्य सहकारी बैंक अपेक्स के प्रबंध संचालक कांडे जो कि मूलतः सहकारिता विभाग के है भष्ट्राचार की सभी सीमाएं लांघ चुके हैं। एम.डी. कांडे के रिटायरमेंट में अब चंद माह ही बचें है इसलिए वो हर तरीके को आजमा रहे हैं जिससे वो अधिक से अधिक पैसा बटोर सकें।

जनवरी में आयोजित पत्रकार वार्ता में चेयरमैन केदार गुप्ता के साथ अधिकारी कांडे और श्रीवास्तव (फाइल फोटो)
1. अपेक्स के भ्रष्ट कैडर आफिसर ए.के श्रीवास्तव की संविदा नियुक्ति।
2. रिटायर्ड भ्रष्ट कैडर अधिकारी ए.के श्रीवास्तव और एस.के जोशी को बैंक में सलाहकार के रूप में नियुक्ति।
3. अपेक्स की सरगुजा-रायगढ में संचालित 15 शाखाओं के शाखा प्रबंधकों से धान खरीदी पर 10-10 लाख रुपए की मांग।
4. बैंक की बगीचा शाखा में पदस्थ कर्मचारी द्वारा 5 लाख की डकैती पर जांच की लिपापोती।
केस – 1
अपेक्स के कैडर आफिसर एक.के.श्रीवास्तव पर जिला सहकारी बैंक, रायपुर में बतौर मुख्य कार्यपालन अधिकारी की पदस्थापना के दौरान बैंक की मंडी, सीओडी और रामसागर पारा ब्रांच के 21 खातों से 500 करोड़ के हवाला और अवैध लेनदेन के आरोप लगे थे जिस पर रिजर्व बैंक आफ इंडिया द्वारा व्यक्तिगत दंड की अनुशंसा की गई थी।

हाल ही में राज्य की जांच एजेंसी ACB/EOW ने भी इसी मामले में बैंक प्रबंधन से अपराध पंजीबद्ध करने के लिए पत्राचार भी किया है। इसी मामले में बैंक की आडिटर फर्म अमिताभ अग्रवाल एण्ड कंपनी, में बाम्ब टावरी एण्ड कंपनी और लक्ष्मी तृप्ति एण्ड एसोसिएट को आडिटर पैनल से हटा दिया गया था।

कैडर आफिसर श्रीवास्तव पर कंप्यूटर खरीदी घोटाले में लोक आयोग में भी जांच चल रही हैं। इसके अलावा पूर्व कर्मचारी किशोर कुमार बाघ ने भी जिला न्यायालय रायपुर में एक परिवाद दायर किया है और बैंक प्रबंधन को पत्र लिखा है कि सेवानिवृत्ति के उपरांत ए.के. श्रीवास्तव को प्राप्त होने वाले सभी आर्थिक लाभो को न्यायालय के फैसले तक रोक दिया जाये। पूर्ववर्ती एक मामले में किशोर कुमार बाघ के पक्ष में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया था।

इसी भ्रष्ट अधिकारी को 31 जनवरी को सेवानिवृत्ति के बाद पुनः संविदा नियुक्ति की तैयारी कर ली गई थी। एमडी कांडे ने प्रस्ताव तैयार कर पंजीयक, सहकारिता को अनुमोदन के लिए भी भेज दिया गया था। पंरतु आईएएस एवं तात्कालिक पंजीयक, सहकारिता कुलदीप शर्मा की नोटशीट में की गई क्वैरी ने एमडी कांडे की योजना को पलीता लगा दिया। सेवानिवृत्ति के बाद भी कैडर आफिसर एक.के.श्रीवास्तव द्वारा बैंक से प्राप्त सभी सुविधाओं का लाभ लिया जा रहा था।
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पंरतु जब पंजीयक, सहकारिता की नोटशीट में की गई क्वैरी से समझ आ गया कि संविदा नियुक्ति संभव नहीं है तो बैंक की सुविधाओं को लौटाया गया। इसके बाद अब भ्रष्ट अधिकारी ए.के. श्रीवास्तव और एस.के.जोशी को बतौर सलाहकार बैंक में नियुक्त करने की तैयारी शुरू कर दी गई है और इस पर प्रस्ताव और कानूनी प्रावधानों की प्रक्रिया के लिए प्रबंधक एल.के.चौधरी को निर्देश दिए गये है।
वैसे भी एमडी कांडे रिटायरमेंट की दहलीज पर खड़े हैं। दहलीज पर खड़ा आदमी नियमों से नहीं चलता। कई बार वह इतना ढीठ हो जाता है कि उसे फटकार का अहसास तक नहीं होता। वह सोचता है कि अब दिन ही कितने बचे हैं। पंरतु वह यह भूल जाता है की सरकार की फाइल कभी मरती नहीं है बस कुछ समय के लिए रोक दी जाती है और ज़रूरत होती है तो फिर से खोल दी जाती है।
अपेक्स में हो रहे इन भंयकर भष्ट्राचार, गबन-घोटालो-फर्जीवाडो और धांधलियों पर सहकारिता मंत्री केदार कश्यप और बैंक के चेयरमैन केदार गुप्ता की चुप्पी समझ से परे है। क्या विभागीय मंत्री और चेयरमैन को जानकारी नहीं है या मौन स्वीकृति है। क्योंकि एमडी कांडे विभागीय मंत्री केदार कश्यप के ओएसडी भी है, तो संभावना क्षीण है कि जानकारी ना हो। यह एक यक्ष प्रश्न है…….?
अपेक्स के भ्रष्ट M.D. कांडे की अपने रिटायर साथियों के वापसी को आईएएस शर्मा ने रोका तो बैक डोर एंट्री की तैयारी…? 2



