रायपुर। छत्तीसगढ़, जिसे कभी “धान का कटोरा” कहा जाता था, अब अवैध अफीम खेती के बढ़ते मामलों से चिंताजनक स्थिति में नजर आ रहा है। बीते 15 दिनों के भीतर दुर्ग, बलरामपुर और रायगढ़ जिलों में अवैध अफीम की खेती के तीन बड़े मामलों का खुलासा हुआ है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने राज्य में सक्रिय संगठित नशा नेटवर्क की आशंका को मजबूत कर दिया है।
दुर्ग में 8 करोड़ की अफीम, भाजपा नेता गिरफ्तार
दुर्ग जिले के समोदा गांव में 4 से 6 एकड़ भूमि पर मक्के की फसल के बीच छिपाकर अफीम की खेती की जा रही थी। जब पुलिस और नारकोटिक्स टीम ने कार्रवाई की, तो करीब 7 से 8 करोड़ रुपये मूल्य की फसल बरामद हुई। इस मामले में भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व नेता विनायक ताम्रकार सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। खेत की सुरक्षा के लिए बाउंसर तैनात होने का खुलासा भी हुआ है।
बलरामपुर में आदिवासी जमीन पर बाहरी गिरोह सक्रिय
बलरामपुर जिले के कुसमी और कोरंधा क्षेत्र में 2.5 से 9 एकड़ तक फैली अफीम की खेती का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि आदिवासी किसानों की जमीन लीज पर लेकर झारखंड से जुड़े गिरोह इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहे थे। पुलिस ने 7 से 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य सरगना अब भी फरार बताया जा रहा है।
रायगढ़ में ‘तरबूज खेती’ की आड़ में नशे का कारोबार
रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र के आमाघाट में नदी किनारे तरबूज और ककड़ी की खेती की आड़ में 1 से 1.5 एकड़ में अफीम उगाई जा रही थी। इस मामले में हरियाणा और झारखंड कनेक्शन सामने आया है। पुलिस ने मार्शल सांगा नामक आरोपी को गिरफ्तार किया है।
सवालों के घेरे में निगरानी तंत्र
लगातार सामने आ रहे मामलों ने प्रशासनिक और खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इतने बड़े पैमाने पर खेती की जानकारी पहले क्यों नहीं मिली?
क्या स्थानीय स्तर पर मिलीभगत की संभावना से इनकार किया जा सकता है?
सीमावर्ती जिलों में अंतरराज्यीय नेटवर्क कैसे सक्रिय रहा?
सियासत तेज, आरोप-प्रत्यारोप शुरू
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इन घटनाओं को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “किसानों की आय दोगुनी नहीं, सौ गुनी करने का नया तरीका अपनाया जा रहा है।” उन्होंने मौके का दौरा कर वीडियो भी जारी किए। और विधानसभा में भी मुद्दा उठाया।
वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मामले को गंभीर बताते हुए “जीरो टॉलरेंस” की नीति दोहराई है। आरोपी नेता को निलंबित कर सभी जिलों के कलेक्टरों से 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है।
संयुक्त कार्रवाई जारी, लेकिन देर से उठे कदम
पुलिस, राजस्व विभाग और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की संयुक्त टीमें अब सक्रिय होकर फसलों को नष्ट कर रही हैं और आरोपियों की गिरफ्तारी कर रही हैं। हालांकि, यह कार्रवाई घटनाओं के खुलासे के बाद शुरू होने पर सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी: उभरता नशा हॉटस्पॉट
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त और निरंतर कार्रवाई नहीं की गई, तो छत्तीसगढ़ नशे के अवैध कारोबार का नया केंद्र बन सकता है।
सख्त कार्रवाई की जरूरत
राज्य सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अवैध अफीम खेती पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने की है। केवल घोषणाओं से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर सख्त और निरंतर कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि इस बढ़ते खतरे पर समय रहते काबू पाया जा सके।



