पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर/ छत्तीसगढ़. राज्य के आदिवासी विकास विभाग में फर्जी तरीके से नियुक्ति पायें बाबूओं का भारी दबदबा है और वो विभाग की संचालित योजनाओं के करोड़ों रुपए में फर्जीवाड़ा और गबन घोटाले को बड़ी मात्रा में अंजाम देते है।
राजधानी रायपुर में पदस्थ लिलेश्वर देवांगन और न्यायधानी बिलासपुर में पदस्थ पवन कुमार शर्मा इसके साक्षात् उदाहरण है और विभागीय भ्रष्ट्राचार में राज्य के अन्य जिलों के बाबूओं के लिए मिसाल सहित शिक्षकों की भूमिका में दिखाई देते हैं। फर्जी तरीके से नियुक्ति पायें इन बाबूओं के विरुद्ध जांच, स्थानांतरण अथवा अनिवार्य सेवानिवृत्ति तक की कार्यवाही अंजाम तक पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ देती है।
राजधानी रायपुर में वर्ष 1992 में लिलेश्वर देवांगन की नियुक्ति एक चतुर्थ श्रेणी नैमितिक कर्मचारी के रूप में हुई थी। लेकिन विभाग में 1989 से कार्यरत बता कर वेतन आहरण आदेश तात्कालिक जिला संयोजक सी.एस.राय. ने जारी किया। इसके कुछ समय बाद इसकी नियुक्ति अस्थाई रूप से नियमित वेतनमान पर की गई।
यह भी पढ़े :- तीन जिले में सिमटे नक्सलवाद, ये जिला भी जल्द नक्सल मुक्त होगा : डिप्टी सीएम अरुण साव

बाद में नियम कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए और फर्जीवाड़ा कर लिलेश्वर देवांगन को लिपीकीय सेवा में नियमित कर दिया गया। दस्तावेज़ी साक्ष्यों से स्पष्ट है कि लिलेश्वर देवांगन की प्रथम नियुक्ति से लेकर सभी पदोन्नति फर्जी तरीके से की गई।

राज्य बनने के बाद इसने भ्रष्ट्राचार के झंडे गाड़ दिए विभागीय निर्माण कार्य हो या खरीदीं अपने चहेती फर्मों को ही दिया गया। विभागीय छात्रावासों में अधीक्षकों की नियुक्ति भी ये तय करने लगा वो भी बकायदा बोली लगा कर। 2.44 करोड़ के एक विभागीय घोटाले में निलंबित इस बाबू को बहुत जल्द बहाल कर वापस जिला मुख्यालय के सहायक आयुक्त कार्यालय में पदस्थ कर दिया गया साथ ही सभी पूर्ववर्ती प्रभार भी दे दिया गया। इसका ट्रांसफर कहीं भी किया जाता है चाहे प्रयास आवासीय विद्यालय या हाईस्कूल दर्रीपारा गरियाबंद में लिलेश्वर देवांगन जिला मुख्यालय में ही तैनात रहता है।

विभाग में बाबूओं के कब्जे का एक और मिसाल है सहायक आयुक्त कार्यालय, बिलासपुर में पदस्थ पवन कुमार शर्मा। पिछले चार दशक से इसका जिला मुख्यालय से बाहर तबादला ही नहीं हुआ नियुक्ति निम्न श्रेणी लिपिक में हुई थी पदोन्नतियों के उपरांत पवन कुमार शर्मा कनिष्ठ लेखा अधिकारी बन गया। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक दिलीप लहरिया ने जुलाई 2025 के मानसून सत्र में इस की पदस्थापना पर विधानसभा में ध्यानाकर्षण भी लगाया था।

ध्यानाकर्षण में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि विभिन्न आदेशों और शासन स्तरीय अनुशंसाओं के बावजूद पवन कुमार शर्मा सहायक आयुक्त कार्यालय, बिलासपुर में ही पदस्थ हैं। दर्जनों बार इसके विरुद्ध जांच, स्थानांतरण अथवा कार्यमुक्ति हेतु प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया परंतु संरक्षण की वजह से आज तक कोई कार्यवाही संभव नहीं हो पाई।

जबकि 2018 में ही तात्कालिक कलेक्टर, बिलासपुर ने पवन कुमार शर्मा की अनिवार्य सेवानिवृत्ति की अनुशंसा कर दी थी।
राज्य के आदिवासी विकास विभाग में फर्जी बाबूओं का कब्जा, करोड़ों के फंड का करते हैं फर्जीवाड़ा-गबन-घोटाला-2



