रायपुर: ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के 9वें संस्करण के दूसरे एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में छात्रों से खुलकर संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर जीवन में सफलता की ऊंचाइयों को छूना है या एक सच्चा लीडर बनना है, तो सबसे पहले निडर बनना होगा। डर से बाहर निकलकर ही व्यक्ति किसी मुकाम तक पहुंच सकता है।
Pariksha Pe Charcha Raipur कार्यक्रम की शुरुआत पीएम मोदी ने ‘जय जोहार’ कहकर की, जिसका छात्रों ने पूरे उत्साह से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षा पर चर्चा का असली उद्देश्य साथ बैठकर संवाद करना, एक-दूसरे को समझना और सीखना है। यह यात्रा कुछ सप्ताह पहले कोयंबतूर से शुरू हुई थी और अब रायपुर तक पहुंची है।
इस दौरान स्थानीय बच्चों ने प्रधानमंत्री को पारंपरिक व्यंजन खुरमी खिलाई, जिसे उन्होंने न सिर्फ चखा बल्कि खुद अपने हाथों से बच्चों में बांटा भी। यह पल कार्यक्रम का खास आकर्षण रहा।
छात्रों के सवालों के जवाब में पीएम मोदी ने परीक्षा के बाद घूमने की इच्छा पर कहा कि यात्रा की शुरुआत अपने आसपास से करनी चाहिए। पहले अपनी तहसील, फिर जिला और राज्य की अनदेखी जगहों को जानो। साधारण तरीके से यात्रा करना—जैसे ट्रेन में सफर, घर का खाना और आम लोगों के बीच रहना—जीवन का असली अनुभव देता है।
परीक्षा तनाव पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आत्मविश्वास सबसे बड़ा हथियार है। जो पढ़ा है, वह भीतर जमा है। घबराने के बजाय शांत मन से प्रश्नपत्र को देखना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी विषय में कमजोर हों तो उस विषय में कमजोर छात्र को पढ़ाना शुरू करें, इससे खुद की पकड़ मजबूत होती है।
खेल और पढ़ाई के संतुलन पर उन्होंने कहा कि दोनों ही जीवन के लिए जरूरी हैं। खेल अनुशासन और संतुलन सिखाता है। वहीं पर्यावरण संरक्षण पर उन्होंने छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा बदलाव लाने का संदेश दिया।
नेतृत्व पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “कोई करे या न करे, मैं करूंगा”—यही सोच लीडरशिप की शुरुआत है। कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने इस संवाद को प्रेरणादायक बताते हुए खुशी जताई।



