Mallikarjun Kharge in Rajya Sabha: राज्यसभा में आज मंगलवार को ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर आयोजित विशेष चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता संग्राम को लेकर भाजपा के बयानों का कड़ा विरोध किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भाजपा नेतृत्व पर ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़–मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया।
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खरगे ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के पहले दो छंदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाने का निर्णय केवल पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा नहीं बल्कि महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस, मदन मोहन मालवीय और आचार्य जेबी कृपलानी जैसे नेताओं की सहमति से लिया गया था। (Mallikarjun Kharge in Rajya Sabha)
“हमेशा ‘वंदे मातरम्’ गाया, आज देशभक्ति का प्रमाण मांगा जा रहा” – खरगे
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा यह कहे जाने पर कि केवल दो छंदों को अपनाने के पीछे तुष्टिकरण की राजनीति थी, खरगे ने ‘वंदे मातरम्’ का उद्घोष करते हुए अपनी बात शुरू की। उन्होंने कहा:
“हम हमेशा से वंदे मातरम् गा रहे हैं। जब 1921 में असहयोग आंदोलन हुआ, कांग्रेस के नेता जेल जाते समय वंदे मातरम् गाते थे। उस समय हम आंदोलन में थे, आप कहाँ थे?”
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व पर देशभक्ति सिखाने का प्रयास अनुचित है, क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम के समय दोनों दल अलग भूमिकाओं में थे।
नेहरू को निशाना बनाना अनुचित
खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह नेहरू के प्रति अनादर का मौका नहीं छोड़ते, जबकि ‘वंदे मातरम्’ पर अंतिम निर्णय एक सामूहिक सहमति थी। उन्होंने पूछा:
“जब यह निर्णय एक समिति में सर्वसम्मति से लिया गया, तो अकेले नेहरू जी को क्यों निशाना बनाया जा रहा है?”
देश की मौजूदा चुनौतियों से ध्यान हटाने का आरोप
खरगे ने कहा कि यह बहस जनता की समस्याओं जैसे बेरोजगारी, महंगाई और कृषि संकट से ध्यान हटाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ सबके लिए मूल मंत्र है, जो देश के प्रति कर्तव्य, समर्पण और एकता का प्रतीक है। (Mallikarjun Kharge in Rajya Sabha)



