धर्मनगरी हरिद्वार में इन दिनों गंगनहर की वार्षिक बंदी के चलते गंगा की धारा का प्रवाह थमा हुआ है। मां गंगा में स्नान करने की कामना लेकर हरिद्वार पहुंच रहे श्रद्धालुओं को घाटों पर पानी कम होने के कारण निराशा का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, गंगा की धारा थमने का असर स्थानीय व्यापार पर भी देखने को मिल रहा है। लेकिन इस बंदी के बीच कुछ ऐसे परिवार भी हैं, जिनके लिए सूखी गंगा किसी उम्मीद से कम नहीं है।
ये लोग गंगा की तलहटी में उतरकर सिक्के, तांबे की वस्तुएं और कभी-कभार सोने-चांदी की छोटी चीजें तलाशते हैं। दिनभर की मेहनत के बाद मिलने वाली इन वस्तुओं से इनके घर का खर्च चलता है और त्योहारों के दिनों में परिवारों को आर्थिक सहारा मिलता है।
गंगा बंदी के दौरान एक ओर जहां उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से घाटों की सफाई, मरम्मत और आवश्यक निर्माण कार्य कराए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर गंगा की तलहटी में लोगों की एक अलग ही दुनिया नजर आती है। सुबह होते ही कई लोग अपने परिवारों के साथ गंगा के सूखे हिस्सों में पहुंच जाते हैं। हाथों में छोटी छड़ियां, जालियां और दूसरे साधारण उपकरण लेकर वे मिट्टी और रेत में अपने लिए कमाई तलाशते हैं।
किसी को कुछ सिक्के मिलते हैं, तो किसी के हाथ तांबे की वस्तुएं लगती हैं। कभी किसी को सोने या चांदी की छोटी वस्तु मिल जाने पर पूरे दिन की मेहनत सफल हो जाती है




