बिलासपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 22 और 23 अक्टूबर को बिलासपुर में रहेंगे। अपने प्रवास के दौरान वे कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित विजयादशमी उत्सव में शामिल होंगे। इसके साथ ही संघ की विभाग टोली और प्रांत कार्यकारिणी की बैठकों में हिस्सा लेकर संगठन की गतिविधियों, शाखाओं के विस्तार और आगामी कार्यक्रमों की समीक्षा करेंगे। 22 अक्टूबर की शाम 7 बजे उनका बौद्धिक वर्ग भी प्रस्तावित है।
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संघ प्रमुख का यह दौरा संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान वर्षभर के कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ छत्तीसगढ़ में संघ की गतिविधियों को अधिक व्यापक बनाने पर चर्चा हो सकती है। बैठक में प्रांत के संगठनात्मक पुनर्गठन का प्रस्ताव भी प्रमुख विषयों में शामिल रहने की संभावना है।
छत्तीसगढ़ को दो प्रांतों में बांटने के प्रस्ताव पर चर्चा
संघ के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव के प्रस्ताव के तहत छत्तीसगढ़ को दो प्रांतों में विभाजित करने पर विचार किया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में बिलासपुर और सरगुजा संभाग के जिलों को एक प्रांत में, जबकि रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग के जिलों को दूसरे प्रांत में शामिल किए जाने की संभावना है।
यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो संगठनात्मक जिम्मेदारियों के लिए दो प्रांत प्रचारकों की व्यवस्था की जा सकती है। नई व्यवस्था को जनवरी से लागू करने की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, प्रांतों के पुनर्गठन और इसे लागू करने की समय-सीमा पर अंतिम निर्णय संघ की संबंधित बैठक में ही स्पष्ट होगा।
शाखाओं के विस्तार और संगठन की समीक्षा
संघ की बैठकों में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में चल रही गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी। संगठन का जोर सभी जिलों में शाखाओं और स्वयंसेवकों की भागीदारी बढ़ाने पर है। विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र में संगठनात्मक पहुंच मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर गतिविधियों का विस्तार करने को लेकर चर्चा होने की संभावना है।
बैठकों में अलग-अलग क्षेत्रों से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर आगामी कार्यक्रमों की प्राथमिकताएं तय की जा सकती हैं। इसके अलावा सामाजिक संपर्क और विभिन्न वर्गों के बीच संगठन की गतिविधियों को बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श हो सकता है।
करीब 250 पदाधिकारियों के शामिल होने की संभावना
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, विभाग टोली की बैठक में लगभग 150 पदाधिकारी शामिल हो सकते हैं। इसमें विभिन्न विभागों की गतिविधियों और कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की जाएगी। वहीं, संघ से जुड़े आनुषंगिक संगठनों की प्रांत कार्यकारिणी की बैठक में करीब 100 पदाधिकारियों के भाग लेने की संभावना है।
इन बैठकों में संगठनात्मक कामकाज का आकलन करने के साथ आगामी वर्ष की योजनाओं और कार्यक्रमों पर चर्चा की जाएगी। पदाधिकारियों से क्षेत्रवार गतिविधियों की जानकारी लेकर आगे की कार्ययोजना तैयार किए जाने की संभावना है।
युवाओं को संगठन से जोड़ने पर भी फोकस
संघ की आगामी रणनीति में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने को भी अहम माना जा रहा है। विशेष रूप से 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों को संगठन और उससे जुड़े कार्यक्रमों से जोड़ने, प्रशिक्षण गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण से संबंधित विषयों पर संवाद बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है।
इसके साथ ही समाज के विभिन्न वर्गों तक संपर्क बढ़ाने और स्वयंसेवकों के माध्यम से संघ की विचारधारा एवं गतिविधियों की जानकारी पहुंचाने पर भी जोर रहने की संभावना है। बिलासपुर प्रवास के दौरान इन विषयों की समीक्षा के साथ संगठन के भविष्य के कार्यक्रमों की दिशा तय की जा सकती है।




