महासमुंद। नगर के स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, नयापारा महासमुंद में भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम (NHDP) योजना के तहत तीन दिवसीय हस्तशिल्प कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विद्यालय के लगभग 100 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा विभिन्न पारंपरिक भारतीय कलाओं एवं हस्तशिल्प की बारीकियों को जाना।

कार्यशाला में विद्यार्थियों को बस्तर आयरन क्राफ्ट, फोक पेंटिंग, टेराकोटा मूर्तिकला एवं बांस शिल्प जैसी पारंपरिक कलाओं से परिचित कराया गया। शिल्पकारों ने विद्यार्थियों को इन कलाओं की निर्माण प्रक्रिया, उनकी विशेषताओं तथा भारतीय संस्कृति में उनके महत्व की जानकारी दी। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता, कलात्मक अभिरुचि एवं पारंपरिक भारतीय शिल्प के प्रति जागरूकता विकसित करना रहा।

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती अमी रूफस द्वारा राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों एवं शिल्पकारों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर हस्तशिल्प संवर्धन अधिकारी आर.एन. देवांगन, एल.डी.सी. रोशन कुमार, बांस शिल्पकार पूजा रंगारी, फोक पेंटिंग कलाकार भारती यादव, बस्तर आयरन क्राफ्ट कलाकार शंकर सोढ़ी, तथा मिट्टी शिल्पकार अमित सैनी एवं गोविंद चक्रधारी उपस्थित रहे।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को पारंपरिक शिल्पकला की उपयोगिता, उसकी सांस्कृतिक विरासत तथा रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावनाओं के संबंध में भी जानकारी प्रदान की गई। इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने तथा उनकी छिपी हुई प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कार्यक्रम का संचालन ध्रुति श्रीवास्तव ने किया तथा आभार प्रदर्शन वरिष्ठ व्याख्याता प्रमोद कन्नौज द्वारा किया गया।
इस अवसर पर विद्यालय के वरिष्ठ व्याख्याता गोसाई राम टांडेकर, अर्चना तिवारी, हरीश पाण्डेय, शिक्षिका प्रणिता शर्मा, ऋतुराज देवांगन सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे।
विद्यालय परिवार ने इस कार्यशाला को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों को भारतीय पारंपरिक कला, संस्कृति एवं शिल्प विरासत को समझने और उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है।




