RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक का आज बुधवार, 7 अक्टूबर को आखिरी दिन है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा सुबह 10 बजे समिति के फैसलों का ऐलान करेंगे। सबसे बड़ा सवाल रेपो रेट को लेकर है। बाजार में इस बार 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। ऐसा हुआ तो रेपो रेट मौजूदा 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो जाएगा। हालांकि, सभी अर्थशास्त्री इस अनुमान से सहमत नहीं हैं।
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रेपो रेट बढ़ने की स्थिति में बैंकों की कर्ज दरों पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर नए कर्ज लेने वाले ग्राहकों के साथ-साथ फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्ज की EMI पर भी पड़ने की संभावना रहेगी।
RBI के फैसले पर महंगाई और कच्चे तेल की नजर
इस बार मौद्रिक नीति का फैसला ऐसे समय में आ रहा है जब महंगाई और वैश्विक बाजार की स्थिति RBI के लिए चुनौती बनी हुई है। अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 फीसदी पहुंच गई, जबकि जुलाई में यह 4.45 फीसदी थी।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी ने भी चिंता बढ़ाई है। ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है। वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी भारतीय बाजार के लिए दबाव बढ़ाने वाला कारक है।
25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अनुमान
बाजार के एक बड़े हिस्से में इस बार 0.25 फीसदी की रेपो रेट बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, यह फैसला पूरी तरह तय नहीं माना जा रहा है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि RBI तत्काल दर बढ़ाने के बजाय कुछ समय और इंतजार कर सकता है।
अगर आज दरों में बढ़ोतरी होती है तो बाजार के लिए यह पूरी तरह चौंकाने वाला फैसला नहीं होगा, क्योंकि इसकी संभावना पहले से ही जताई जा रही है। ऐसे में निवेशकों की नजर सिर्फ रेपो रेट पर नहीं, बल्कि RBI की आगे की रणनीति और गवर्नर के बयान पर भी रहेगी।
बैंक ऑफ बड़ौदा के अर्थशास्त्री की राय अलग
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का अनुमान बाजार की आम राय से अलग है। उनका मानना है कि RBI अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रख सकता है और दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला दिसंबर से शुरू हो सकता है।
उनके मुताबिक, RBI के पास सितंबर और अक्टूबर के महंगाई आंकड़ों का आकलन करने के लिए अभी समय है। इसके अलावा खरीफ फसल की स्थिति और त्योहारी सीजन में मांग का रुझान भी आने वाले महीनों में ज्यादा स्पष्ट हो जाएगा। इन आंकड़ों के आधार पर केंद्रीय बैंक दिसंबर में दरों को लेकर बड़ा फैसला कर सकता है।
रेपो रेट बढ़ने पर आपकी EMI पर क्या असर पड़ेगा?
रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर बैंकिंग सिस्टम की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। खासतौर पर फ्लोटिंग ब्याज दर वाले होम लोन और अन्य कर्ज की EMI बढ़ने की संभावना रहती है।
हालांकि, EMI में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी, यह बैंक की ब्याज दर, लोन की अवधि, बकाया रकम और ग्राहक के लोन समझौते पर निर्भर करेगा। इसलिए सिर्फ रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी को सभी ग्राहकों के लिए समान EMI बढ़ोतरी के रूप में नहीं देखा जा सकता।
आज के फैसले से ज्यादा अहम होगी RBI की आगे की रणनीति
बाजार में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अनुमान पहले से मौजूद है। ऐसे में आज की बैठक के बाद RBI का आगे का रुख बाजार की दिशा तय करने में ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
केंद्रीय बैंक महंगाई, कच्चे तेल, रुपये की चाल और घरेलू मांग को किस तरह देखता है और आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर क्या संकेत देता है, इस पर निवेशकों और बैंकिंग सेक्टर की खास नजर रहेगी।




