रायपुर। महज दो महीने पहले रेस-वॉक शुरू करने वाली बेथलीन ग्रेस माकरी ने अपने आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीतकर सभी को चौंका दिया है।
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शिलांग के साई स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर में पिछले साल 29 दिसंबर को उनके कोच ने उनमें रेस-वॉक एथलीट बनने की क्षमता देखी। दिलचस्प बात यह रही कि उस समय बेथलीन इस खेल के बारे में लगभग अनजान थीं। इससे पहले वह मिडिल और लॉन्ग-डिस्टेंस रनर के रूप में प्रतिस्पर्धा करती थीं।
2026 की शुरुआत में खेल बदलने का फैसला उनके लिए आसान नहीं था। खासी ट्राइब से आने वाली इस युवा एथलीट को शुरुआती दिनों में रेस-वॉक की तकनीक सीखने में काफी संघर्ष करना पड़ा। शरीर में दर्द, नींद की कमी और आत्म-संदेह जैसे हालातों का भी उन्होंने सामना किया।
लेकिन कोच और परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी बेथलीन ने पूरी लगन के साथ इस नई चुनौती को स्वीकार किया और खुद को साबित करने में जुट गईं। इसके बाद उन्होंने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में हिस्सा लेने के लिए जगदलपुर का रुख किया।
बुधवार को उनके संघर्ष का फल मिला, जब उन्होंने महिलाओं की रेस-वॉक स्पर्धा में 1:05:18 का समय निकालकर कांस्य पदक अपने नाम किया। इस स्पर्धा में झारखंड की नेहा ज़ालक्सो (1:04:02) और ओडिशा की एलीश एक्का (1:04:59) क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर रहीं।
पदक जीतने के बाद बेथलीन ने इसका श्रेय अपने कोच और परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआती दो हफ्ते बेहद कठिन थे, लेकिन लगातार प्रेरणा और समर्थन ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया।
शिलांग कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा बेथलीन को इस बात पर गर्व है कि वह मेघालय की पहली रेस वॉकर हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल किया है। उनका मानना है कि यह उपलब्धि राज्य के युवाओं को इस खेल की ओर आकर्षित करेगी और उन्हें भी अब यह खेल बेहद पसंद आने लगा है।



