रायपुर। आम आदमी पार्टी (AAP) ने छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित बिजली दर वृद्धि को सरकार के कुप्रबंधन का परिणाम बताते हुए 2 अप्रैल को प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि दर वृद्धि वापस नहीं ली गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता जयदीप खनूजा, कर्मचारी विंग के प्रदेश अध्यक्ष विजय झा, प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ़, संयुक्त सचिव कलावती मार्को और मीडिया प्रभारी मिहिर कुर्मी ने सरकार पर जमकर निशाना साधा।
“बिजली सरप्लस राज्य में दर वृद्धि अनुचित”
पार्टी नेताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे बिजली सरप्लस राज्य में बार-बार दर बढ़ाना आम जनता पर अनावश्यक बोझ डालना है। वर्ष 2025 में भी जुलाई महीने में बिजली दरों में वृद्धि की गई थी और अब फिर से दर बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
AAP का आरोप है कि बिजली कंपनियां हजारों करोड़ का घाटा दिखाकर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली कर रही हैं, जबकि बिजली बिल में ऊर्जा प्रभार के साथ कई “अनावश्यक चार्ज” जोड़े जा रहे हैं।
सरकार के सामने रखी 6 प्रमुख मांगें
AAP ने बिजली दर वृद्धि के विरोध में सरकार के सामने छह सूत्रीय मांगें रखी हैं—
प्रस्तावित बिजली दर वृद्धि तत्काल वापस ली जाए और पहले से बढ़ी दरों में कमी की जाए।
बड़े बकायादार उद्योगपतियों और सरकारी विभागों से लंबित बिजली बिल की वसूली की जाए, अन्यथा कनेक्शन काटे जाएं।
स्मार्ट मीटर प्रणाली में सुधार किया जाए या पुरानी मीटर व्यवस्था बहाल की जाए।
बिजली कंपनियां अपने खर्चों में कटौती करें, घाटे का बोझ जनता पर न डाला जाए।
विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही असमय बिजली कटौती पर रोक लगे।
ग्रामीण इलाकों में ट्रांसफार्मर की निःशुल्क उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
2 अप्रैल को प्रदेशभर में घेराव और प्रदर्शन
पार्टी ने घोषणा की है कि 2 अप्रैल 2026 को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में बिजली कार्यालयों का घेराव कर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के प्रबंधन और राज्य सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
रायपुर के बिरगांव क्षेत्र में कर्मा चौक, उरला स्थित बिजली कार्यालय में शाम 4 बजे घेराव और धरना प्रस्तावित है।
सरकार को चेतावनी, आंदोलन होगा तेज
AAP ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने बिजली दर वृद्धि का फैसला वापस नहीं लिया, तो पार्टी आम जनता के साथ मिलकर बड़ा और उग्र आंदोलन करेगी। साथ ही कुप्रबंधन के आरोपों को लेकर वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक (MD) से इस्तीफा लेने की मांग भी की गई है।
पार्टी ने यह भी कहा कि यदि सरकार बड़े बकायादारों—सरकारी विभागों और निजी उद्योगों—से हजारों करोड़ रुपये की बकाया राशि की वसूली नहीं करती, तो 1 मई 2026 के बाद पार्टी कार्यकर्ता स्वयं ऐसे उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई करेंगे।



