रायपुर/बिलासपुर, 29 मार्च। Triple Murder Case : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री प्यारेलाल कंवर के परिवार से जुड़े चर्चित ट्रिपल मर्डर केस में बड़ा फैसला सुनाया है। करीब 5 साल बाद आए इस निर्णय में कोर्ट ने दो आरोपियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है, जबकि तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
हाईकोर्ट के इस फैसले से पहले निचली अदालत ने मामले में शामिल सभी पांच आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, अब उच्च न्यायालय ने साक्ष्यों के पुनर्मूल्यांकन के बाद हरभजन सिंह कंवर, उसकी पत्नी धनकुंवर और सुरेंद्र कुमार कंवर को दोषमुक्त कर दिया है। वहीं परमेश्वर और रामप्रसाद की सजा यथावत रखी गई है।
क्या था पूरा मामला?
यह सनसनीखेज हत्याकांड साल 2021 में कोरबा जिले के उरगा थाना क्षेत्र स्थित भैंसा गांव में हुआ था। जमीन विवाद के चलते परिवार के भीतर ही खूनी साजिश रची गई थी। आरोप है कि हमलावरों ने घर में घुसकर प्यारेलाल कंवर के छोटे बेटे हरीश कंवर, उनकी पत्नी और 4 साल की मासूम बेटी की धारदार हथियार से निर्मम हत्या कर दी थी। तीनों के सिर, गर्दन और चेहरे पर ताबड़तोड़ वार किए गए थे।
जांच में सामने आई पारिवारिक रंजिश
घटना के बाद पुलिस जांच में पारिवारिक रंजिश सामने आई। आरोपियों में मृतक का बड़ा भाई, रिश्तेदार और उनके साथी शामिल पाए गए। पुलिस ने एक महिला समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
कौन थे प्यारेलाल कंवर?
प्यारेलाल कंवर अविभाजित मध्यप्रदेश के कद्दावर आदिवासी नेता रहे हैं। उन्होंने लंबे समय तक रामपुर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया और 1997-98 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में उपमुख्यमंत्री पद संभाला।
उनके बेटे हरीश कंवर को क्षेत्र में उनका राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था।



