दिल्ली–अमृतसर–कटरा एक्सप्रेसवे और चंडीगढ़ रिंग रोड परियोजनाओं से यात्रा समय में भारी कमी और ट्रैफिक जाम से राहत
चंडीगढ़ : देश में सड़क अवसंरचना के क्षेत्र में तेजी से हो रहे परिवर्तन के बीच (NHAI) ने नवाचार और सतत विकास को केंद्र में रखते हुए नई तकनीकों को अपनाना शुरू किया है। सड़क निर्माण में अब पारंपरिक सामग्रियों के साथ-साथ ठोस कचरा, फ्लाई ऐश और कृषि अपशिष्ट जैसे राइस हस्क (धान की भूसी) का उपयोग किया जा रहा है। इस दिशा में के साथ किए गए समझौते के तहत राइस हस्क, फ्लाई ऐश और मिट्टी के मिश्रण से सड़क निर्माण का प्रयोग 300 मीटर के ट्रायल पैच के रूप में शुरू किया जा रहा है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण, लागत में कमी और संसाधनों के कुशल उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर द्वारा छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के लिए आयोजित पंजाब अध्ययन दौरे के दौरान सड़क अवसंरचना के क्षेत्र में हो रहे इन नवाचारों और विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी साझा की गई। इस अवसर पर NHAI के क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आशिम बंसल ने विभिन्न परियोजनाओं और नई तकनीकों पर प्रकाश डाला।
NHAI द्वारा पूर्व में भी वैकल्पिक संसाधनों के उपयोग में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की जा चुकी है। मोहाली क्षेत्र में लगभग 30,000 मीट्रिक टन ठोस कचरे का उपयोग कर सड़क निर्माण किया गया, जिससे न केवल लैंडफिल पर दबाव कम हुआ, बल्कि लागत में भी कमी आई। इस प्रकार, सड़क निर्माण अब पर्यावरणीय दृष्टि से अधिक जिम्मेदार और टिकाऊ बनता जा रहा है।
चंडीगढ़ ट्राईसिटी में रिंग रोड और बायपास नेटवर्क
चंडीगढ़, मोहाली और पंचकुला क्षेत्र में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए लगभग 120 किलोमीटर लंबे रिंग रोड नेटवर्क का विकास किया जा रहा है। इसमें ईस्टर्न और वेस्टर्न बायपास शामिल हैं, जो शहर के भीतर के यातायात को बाहर डायवर्ट कर भीड़भाड़ को कम करेंगे।
परियोजना के कई हिस्से पूर्ण हो चुके हैं, जबकि कुछ निर्माणाधीन हैं और कुछ DPR चरण में हैं। आने वाले लगभग ढाई वर्षों में इस नेटवर्क के पूर्ण होने की संभावना है।
यह प्रणाली के आउटर रिंग रोड की तर्ज पर विकसित की जा रही है, जिससे दीर्घकालिक ट्रैफिक प्रबंधन सुनिश्चित होगा।
बेहतर कनेक्टिविटी और यातायात में सुधार
नई सड़क परियोजनाओं से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई गति मिल रही है। दिल्ली से और जाने वाले यात्रियों को अब भीड़भाड़ वाले मार्गों से गुजरने की आवश्यकता कम होगी, क्योंकि बायपास मार्ग तेज और सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेंगे।
इसके अतिरिक्त, लुधियाना क्षेत्र में एयरपोर्ट तक सीधी पहुंच सुनिश्चित होने से औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और आधुनिक डिजाइन
नई परियोजनाओं में ग्रीनफील्ड और एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर को प्राथमिकता दी जा रही है। इन सड़कों में बेहतर ज्योमेट्रिक्स, सीधी अलाइनमेंट और उच्च गति के अनुरूप डिजाइन शामिल हैं, जिससे यात्रा सुरक्षित, सुगम और समयबद्ध बनती है।
दिल्ली–अमृतसर–कटरा एक्सप्रेसवे: एक परिवर्तनकारी पहल
लगभग 670 किलोमीटर लंबा दिल्ली–अमृतसर–कटरा एक्सप्रेसवे उत्तर भारत की एक प्रमुख परियोजना है। यह एक्सप्रेसवे दिल्ली के बहादुरगढ़ बॉर्डर को हरियाणा और पंजाब के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के से जोड़ेगा।
परियोजना के पूर्ण होने पर दिल्ली से कटरा की दूरी 727 किलोमीटर से घटकर 588 किलोमीटर रह जाएगी और यात्रा समय 14 घंटे से घटकर लगभग 6 घंटे हो जाएगा। वहीं, दिल्ली से अमृतसर की यात्रा भी लगभग 4 घंटे में पूरी हो सकेगी।
यात्री सुविधाएं, हरित पहल और स्मार्ट तकनीक
इन परियोजनाओं में यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रॉमा सेंटर, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, बस-बे, ट्रक ले-बाय और अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
पर्यावरण संरक्षण के तहत चंडीगढ़ क्षेत्र में लगभग 70,000 पौधे लगाए गए हैं, जो हरित संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं।
साथ ही, एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ADMS) के माध्यम से ट्रैफिक की निगरानी और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। भविष्य में इस डेटा को राज्य सरकारों के साथ साझा करने की योजना है।
पंजाब और हरियाणा में व्यापक परियोजनाएं
पंजाब में लगभग 30 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं क्रियान्वयनाधीन हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 1100 किलोमीटर और लागत लगभग 44,000 करोड़ रुपये है।
हरियाणा में 8 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 275 किलोमीटर और लागत लगभग 10,000 करोड़ रुपये है।
राष्ट्रीय राजमार्ग-54 के अंतर्गत बठिंडा क्षेत्र में जोधपुर रोमाना से मंडी डबवाली खंड का छह-लेन उन्नयन कार्य भी प्रगति पर है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और मजबूती मिलेगी।
इन सभी परियोजनाओं के माध्यम से यात्रा समय और दूरी में कमी, ईंधन की बचत, प्रदूषण में कमी, औद्योगिक विकास, कृषि आपूर्ति श्रृंखला में सुधार तथा पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
इस प्रकार, NHAI की ये पहलें भारत को एक आधुनिक, टिकाऊ और उच्च-गुणवत्ता वाले सड़क नेटवर्क की दिशा में अग्रसर कर रही हैं।



